Usa-Iran peace talks: मध्य-पूर्व मे आजकल जो कंट्रोल को लेके संघर्ष चल रहा है, उसके बारे मे दुनियाभर के देश अलग लग कयास लगा रहे हैं। लेकिन पाकिस्तान ने ये दावा किया है कि वह अमेरिका और ईरान के बीच बहुत ही जल्द एक शांति वार्ता करवा देंगे। एक तरफ तो अमेरिका और इजराइल का गठबंधन बना हुआ है। दूसरी तरफ ईरान अपनी सैन्य क्षमता से जवाब दे रहा है। इस तरह के तनाव भरे माहौल मे एक नया खिलाड़ी बन कर पाकिस्तान उभर रहा है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान अब इस पूरे संघर्ष मे एक बिचौलिये की भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तान अभी तक पूरी तरह से अमेरिका के साथ अपनी वार्ता मे लगा हुआ है। इस्लामाबाद अब एक बड़े शांति सम्मेलन की तैयारी मे लगा हुआ है। इसके अलावा, Usa-Iran peace talks को पाकिस्तान मे करवाने का प्रयास भी जारी है। रेपोर्ट्स के अगर माने तो शाहबाज शरीफ ने दावा किया है की मैं इस शांति वार्ता को पाकिस्तान मे करवाने के लिए बहुत ही ज्यादा उत्सुक हूँ।
Islamabad Summit 2026
सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने हाल ही में डोनाल्ड ट्रम्प के साथ एक अहम बातचीत की। आसिम मुनीर की इस बातचीत को “ब्रेकथ्रू कॉल” माना जा रहा है। जिसने शांति वार्ता की संभावनाओं को और भी मजबूत किया है। आपको बता दें, कि आसिम मुनीर जिनको डोनाल्ड ट्रम्प अपना फेवरेट फील्ड मार्शल बोलते हैं।
यह भी पढ़ें:- UPSI की अन्तिम कुंजी हुई जारी, जाने कितना रहेगा cut off
वहीं दूसरी ओर Usa-Iran peace talks के लिए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ईरान की तरफ अपना प्रयास कर रहे हैं। शहबाज शरीफ का कहना है की वो मसूद पेज़ेशकियन से भी बात की है। अगर आपका सवाल है की मसूद पेज़ेशकियन कौन हैं? तो मैं आपको बता दूँ कि, मसूद पेज़ेशकियन ईरान के नए राष्ट्रपति बने हैं।
Expected participants in peace talk
पाकिस्तान का मानना है कि इस इस्लामाबाद शांति वार्ता मे कई हाई-प्रोफ़ाइल लोगों का अन्य संभव हो सकता है। वैसे, Usa-Iran peace talks में शामिल होने वाले लोग दुनिया भर के मीडिया की नज़र में हैं। जिससे इसे हम एक हाई-प्रोफ़ाइल समिट भी कह सकते हैं। जिसमे कई बड़े नाम भी शामिल हो सकते हैं।
अमेरिकी पक्ष
- स्टीव विटकॉफ
- जारेड कुशनर
- जेडी वेंस
ईरानी पक्ष
- मोहम्मद बाग़ेर ग़ालिबाफ़
हालांकि, ईरान ने आधिकारिक तौर पर पाकिस्तान और अमेरिका की इस कोशिश का मजाक बने है। लेकिन Usa-Iran peace talks के संकेतों पर सूत्र बताते हैं की वह पाकिस्तान के जरिए भेजे गए संदेशों की समीक्षा कर रहा है। जिसका सीधा-सीधा यही निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि, ईरान ऐसा नहीं चाहता।
Usa-Iran peace talks: जानें क्या है ट्रम्प की रणनीति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही मे ईरान के परमाणु ऊर्जा ढांचों को तबाह करने की धमकी दी थी। जिसमे यह कहा गया था की “अगर ईरान ने स्ट्रैट ऑफ होरमुज को 48 घंटों मे नहीं नहीं खोला तो मैं तुम्हारे परमाणु ऊर्जा ढांचे को तबाह कर दूंगा”। लिकन अब उन्होंने 5 दिन के लिए इस हमले को टाल दिया है। यह फैसला इस विचार को जन्म देता है कि, अमेरिका अभी बातचीत का मौका ईरान को देना चाहता है।
Why does Pakistan want to be a mediator?
पाकिस्तान के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने के कई कारण हैं। जिसमे सबसे बड़ा कारण पाकिस्तान की अमेरिका और सऊदी अरब से मित्रता का है। Usa-Iran peace talks से जुड़ी गतिविधियों से पाकिस्तान की स्थिति इस पूरे संकट मे अनोखी है। कोई भी देश बेवजह कभी किसी बिना फायदे के किसी युद्ध को रोकने की कोशिश नहीं करता।
- 2025 में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच डिफेंस पैक्ट हुआ।
- इस समझौते के तहत दोनों मे किसे एक पर हमला दोनों पर हमला माना जाएगा।
- ईरान कभी भी सऊदी अरब पर हमला कर सकता है।
- क्यूंकि सऊदी अरब मे अमेरिकी सैन्य अड्डे हैं।
- अगर ईरान ने सऊदी अरब पर हमला किया तो पाकिस्तान सीधे इस युद्ध मे फस जाएगा।
- दूसरी ओर है ट्रम्प के साथ पाकिस्तान के मजबूत रिश्ते।
- डोनाल्ड ट्रम्प ने कई बार पाकिस्तान के बड़े नेताओं की तारीफ की है।
- पाकिस्तान कहता है की उसके पास अमेरिका का कोई भी सैन्य ठिकाना नहीं है।
- पाकिस्तान की 900 किमी लंबी सीमा सीधे ईरान के साथ लगती है, और Usa-Iran peace talks के लिए ये रणनीति अहम है।
- ईरान में ज्यादातर आबादी सिया मुस्लिम्स की है।
- कच्चे तेज की बढ़ती कीमतें भी पाकिस्तान की कमर तोड़ रही हैं।
- पाकिस्तान की गिरती अर्थव्यवस्था इस महंगाई को झेल नहीं प रही है।
- पाकिस्तान ने तो अपने स्कूलों मे भी कुछ दिनों की छुट्टी इसी लिए कर दी है।
