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अफगानिस्तान-भारत संबंधों में नई मजबूती:

अफगानिस्तान-भारत संबंधों में नई मजबूती:

अफगानिस्तान-भारत संबंधों में नई मजबूती: तालिबान ने भारत को दिया खुला समर्थन, पाकिस्तान पर बढ़ा कूटनीतिक दबाव

अफगानिस्तान-भारत संबंधों में नई मजबूती:

अफगानिस्तान-भारत संबंधों में नई मजबूती:

India-Afghanistan Relations Take a New Turn – नई दिल्ली।
हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत की सक्रिय कूटनीति के चलते

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अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने भारत को अप्रत्याशित समर्थन दिया है। भारत द्वारा की गई

diplomatic out reach  का परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखने लगा है, जब तालिबान ने न सिर्फ

हमले की आलोचना की, बल्कि भारत के साथ खड़े रहने का भी भरोसा जताया।

तालिबान का भारत को समर्थन

भारत के एक वरिष्ठ अधिकारी की काबुल में तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी

से मुलाकात ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी। इस मुलाकात के कुछ ही दिनों बाद तालिबान

की ओर से सार्वजनिक रूप से यह बयान सामने आया कि वे भारत के साथ हैं

और भारत की मांगों के अनुरूप कार्य करने के लिए तैयार हैं।

तालिबान ने पहलगाम हमले की कठोर निंदा करते हुए भारत के रुख का समर्थन किया है।

यह बयान भारत की कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है।अफगानिस्तान-भारत संबंधों में नई मजबूती:

पाकिस्तान पर बढ़ता दबाव

– इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा प्रभाव पाकिस्तान पर पड़ा है। अफगानिस्तान से आए 150 ट्रकों को

पाकिस्तान ने भारत की ओर जाने की अनुमति दे दी है।

यह वही वाघा-अटारी बॉर्डर है जिसे हाल ही में दोनों देशों ने बंद कर दिया था।

पाकिस्तान की विदेश मंत्रालय ने “ब्रदरली रिलेशंस” का हवाला देते हुए यह फैसला लिया है।

हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला मजबूरी में लिया गया है,

क्योंकि तालिबान को नाराज़ करना पाकिस्तान के लिए भारी पड़ सकता है।अफगानिस्तान-भारत संबंधों में नई मजबूती:

तालिबान-पाकिस्तान संबंधों में तनाव

पिछले कुछ महीनों से तालिबान और पाकिस्तान के बीच संबंधों में लगातार गिरावट आई है।

रिपोर्ट्स के अनुसार तालिबान ने पाकिस्तान के पश्चिमी सीमावर्ती इलाकों में हथियार तैनात करने शुरू कर दिए हैं

और कुछ अघोषित क्षेत्रों में आक्रामक मुद्रा भी अपनाई है।

कुछ अनौपचारिक रिपोर्ट्स में यहां तक दावा किया गया है कि तालिबान ने पाकिस्तान के कुछ चीनी J-10 फाइटर जेट्स पर कब्ज़ा कर लिया है।

हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह खबर पाकिस्तान की सुरक्षा नीति के लिए एक गंभीर चेतावनी मानी जा रही है।

काबुल नदी की आपूर्ति पर खतरा

तालिबान ने अब पाकिस्तान को एक और मोर्चे पर चेतावनी दी है — पानी की आपूर्ति।

भारत द्वारा प्रायोजित शहतूत डैम के ज़रिए काबुल नदी के जल प्रवाह को रोके जाने की संभावना पर भी विचार चल रहा है।

इससे पाकिस्तान की जल-सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।

भारत की डिप्लोमैटिक बढ़त
इस पूरे घटनाक्रम में भारत की भूमिका एक सधे हुए कूटनीतिज्ञ की रही है। न सिर्फ अफगानिस्तान के

साथ संपर्क साधा गया, बल्कि G20 और खाड़ी देशों को भी भारत के दृष्टिकोण से अवगत कराया गया है।

हाल ही में कुवैत ने भी पहलगाम हमले पर भारत को पूर्ण समर्थन दिया है।

भारत द्वारा अपनाई गई रणनीतिक कूटनीति ने जहां एक ओर तालिबान को अपने पक्ष में किया है,

वहीं पाकिस्तान को कई मोर्चों पर पीछे हटने को मजबूर किया है। यदि यह दिशा जारी रहती है,

तो भारत दक्षिण एशिया में अपनी डिप्लोमेटिक स्थिति को और अधिक मजबूत कर सकता है।


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