अमेरिकी स्टॉक मार्केट में 4 ट्रिलियन डॉलर का झटका: ट्रंप के बयान से बढ़ा रिसेशन का डर
परिचय
नमस्कार दोस्तों 🙏
ग्लोबली अभी स्टॉक मार्केट्स की हालत पतली है। खासकर अमेरिका में तो माहौल और भी खराब दिख रहा है।
एक जबरदस्त सेल-ऑफ (Sell-off) हुआ है, यानी निवेशकों ने धड़ाधड़ शेयर बेच डाले।
आप इसे ऐसे समझो – जैसे भारत में सेंसेक्स और निफ्टी होते हैं, वैसे ही अमेरिका में Dow Jones, S&P 500 और Nasdaq इंडेक्स हैं।
पिछले कुछ दिनों में इनकी हालत इतनी बिगड़ी कि सिर्फ अमेरिका के स्टॉक मार्केट से ही 4 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हो गया।
अब जरा सोचो – भारत का पूरा BSE (Bombay Stock Exchange) भी इतना वैल्यूएशन नहीं रखता।
मतलब अमेरिका के मार्केट से जो पैसा गायब हुआ, उतना भारत का पूरा स्टॉक एक्सचेंज भी नहीं है।
तो सवाल उठता है – ये गिरावट क्यों हुई? और इसका असर भारत पर कैसा पड़ेगा?
आओ, इस पूरे घटनाक्रम को आसान भाषा में समझते हैं।
ट्रंप का बयान और निवेशकों का डर
असल कहानी शुरू होती है डोनाल्ड ट्रंप से।
कल उन्होंने Fox News को दिए एक इंटरव्यू में कहा –
“I hate to predict things like that…”
यानी मुझे ऐसे बयान देना पसंद नहीं, लेकिन हमारी इकोनॉमी अभी ट्रांजिशन फेज में है।
साफ शब्दों में उन्होंने रिसेशन (मंदी) को नकारा नहीं।
और यहीं से हड़कंप मच गया।
क्यों बड़ा असर पड़ा?
- आमतौर पर नेता जनता को भरोसा दिलाते हैं – “सब अच्छा है, रिसेशन नहीं आएगा।”
- लेकिन ट्रंप ने उल्टा कहा कि “हो भी सकता है।”
- इससे निवेशकों को लगा कि अमेरिका की हालत अंदर से खराब है।
- नतीजा – मार्केट में डर (Fear Sentiment) फैल गया और निवेशकों ने शेयर बेच डाले।
S&P 500 और Nasdaq की हालत
अमेरिका का S&P 500 इंडेक्स, जिसमें 500 सबसे बड़ी कंपनियां आती हैं,
19 फरवरी को अपने पीक (6200 पॉइंट्स) पर था।
लेकिन अब ये 5500 पॉइंट्स के आसपास आ चुका है।
यानी सिर्फ इस इंडेक्स में ही लगभग 8% की गिरावट आई है।
और Nasdaq तो 10% से ज्यादा गिर चुका है, जिसे Correction Phase कहा जाता है।
टेस्ला का बड़ा झटका
सिर्फ एक दिन में टेस्ला का मार्केट कैप लगभग 125 बिलियन डॉलर मिट गया।
इतनी बड़ी गिरावट एक कंपनी में देखकर निवेशकों का भरोसा और हिल गया।
डेल्टा एयरलाइंस जैसी कंपनियों का प्रॉफिट अलर्ट
कुछ कंपनियों ने अपना Profit Forecast घटा दिया है।
मतलब भविष्य में उतना कमाई नहीं होगी जितनी पहले सोची गई थी।
गिरावट की असली वजहें
अब सोचो – सिर्फ ट्रंप का बयान ही सबकुछ खराब कर गया?
नहीं भाई, इसके पीछे कई और कारण भी हैं।
1. हाई स्टॉक वैल्यूएशन
पिछले कई महीनों से अमेरिकी शेयर लगातार चढ़ रहे थे।
मतलब दाम बहुत ज्यादा हो गए थे।
तो जैसे ही नेगेटिव न्यूज़ आई, मार्केट का प्रेशर फट गया।
2. इकोनॉमिक अनसर्टेनटी
निवेशकों को समझ ही नहीं आ रहा –
- ट्रेड पॉलिसी क्या होगी?
- ट्रंप का अगला कदम क्या होगा?
- ब्याज दरें (Interest Rates) घटेंगी या नहीं?
ये सब अनिश्चितता (Uncertainty) डर पैदा करती है।
3. कॉरपोरेट अर्निंग्स का प्रेशर
कई कंपनियों के रिजल्ट उम्मीद से कम आए।
खासकर टेक और एयरलाइन सेक्टर पर ज्यादा असर पड़ा।
4. जॉब्स रिपोर्ट की टेंशन
फरवरी की जॉब रिपोर्ट आई जिसमें सिर्फ 1.51 लाख नई नौकरियां बनीं।
ये नवंबर-दिसंबर से लगभग आधी हैं।
मतलब रोज़गार भी सही रफ्तार से नहीं बढ़ रहा।
5. ब्याज दरों की स्थिति
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने साफ कहा –
“अभी रेट कट नहीं होगा।”
मतलब लोन सस्ता नहीं होगा → निवेश कम होगा → ग्रोथ पर असर पड़ेगा।
व्हाइट हाउस का बचाव
ट्रंप के बयान के बाद व्हाइट हाउस को डैमेज कंट्रोल करना पड़ा।
उन्होंने कहा –
- “रिसेशन का डर बेकार है।”
- “थोड़ी बहुत समस्या है, लेकिन सब ठीक हो जाएगा।”
- “टैक्स कट्स और निवेश से इकोनॉमी फिर पटरी पर आ जाएगी।”
लेकिन मार्केट अब भरोसा करने को तैयार नहीं।
भारत पर इसका असर
अब बड़ा सवाल – इसका असर भारत पर कैसा पड़ेगा?
क्योंकि आज दुनिया ग्लोबलाइज्ड है, अमेरिका हिलता है तो भारत भी कांपता है।
क्या हुआ भारत में?
- अमेरिकी मार्केट गिरते ही भारत का सेंसेक्स सुबह 300 पॉइंट नीचे खुला।
- हालांकि बाद में थोड़ी रिकवरी हुई, लेकिन डर अभी भी बना हुआ है।
भारत क्यों प्रभावित होगा?
- FIIs (Foreign Institutional Investors) पैसा निकाल सकते हैं।
- भारत में भी Economic Slowdown की चिंता है।
- अगर अमेरिका में रिसेशन आता है, तो भारत का IT और Pharma सेक्टर जरूर प्रभावित होगा क्योंकि इनकी डिपेंडेंसी अमेरिका पर है।
निवेशकों के लिए सलाह
एक्सपर्ट्स कहते हैं –
- IT और Pharma शेयरों से फिलहाल दूरी रखो।
- डोमेस्टिक फोकस्ड सेक्टर्स (जैसे FMCG, Infra) पर ज्यादा ध्यान दो।
- वेट एंड वॉच की पॉलिसी अपनाओ, जल्दबाजी में सेलिंग मत करो।
सीख क्या है?
इस पूरे घटनाक्रम से एक बात साफ है –
स्टॉक मार्केट सिर्फ नंबरों का खेल नहीं है, बल्कि भावनाओं (Sentiments) का भी खेल है।
एक बयान, एक अफवाह या एक रिपोर्ट लाखों करोड़ों डूबा सकती है।
इसलिए निवेश करने से पहले सही गाइडेंस, रिसर्च और धैर्य जरूरी है।
निष्कर्ष
अमेरिकी स्टॉक मार्केट से 4 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान दुनिया भर के लिए बड़ा अलार्म है।
डोनाल्ड ट्रंप का बयान रिसेशन की आशंका को और गहरा कर गया।
भारत भी इससे अछूता नहीं रह सकता।
सेंसेक्स और निफ्टी में हलचल पहले ही दिख चुकी है।
अब आने वाले दिनों में फेडरल रिजर्व, RBI और सरकार के फैसले तय करेंगे कि मार्केट किस दिशा में जाएगा।
आपके लिए सवाल
👉 भारत में डिपॉजिटरी सिस्टम को कौन रेगुलेट करता है?
(जवाब कमेंट में बताइए 😊)
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