थाईलैंड-कंबोडिया युद्ध: एक प्राचीन हिंदू मंदिर से शुरू हुई प्रॉक्सी वॉर
लेख: Static Study टीम | July 2025
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!दक्षिण-पूर्व एशिया में एक ऐसा सैन्य टकराव तेजी से उभर रहा है, जिसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है। थाईलैंड और कंबोडिया — ये दो पड़ोसी देश, जिनकी बहुसंख्यक आबादी बौद्ध धर्म को मानती है, अचानक से एक दूसरे के खिलाफ युद्ध की स्थिति में आ खड़े हुए हैं। और इस पूरे विवाद की जड़ है — एक प्राचीन हिंदू मंदिर।
🔥 युद्ध की शुरुआत: अचानक क्यों भड़की हिंसा?
हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मीडिया में यह रिपोर्ट किया गया कि थाईलैंड और कंबोडिया की सेनाएं एक-दूसरे पर रॉकेट और मिसाइल हमले कर रही हैं। थाईलैंड ने अमेरिका की स्वीकृति के बाद F-16 फाइटर जेट्स का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। कंबोडिया की ओर से भी जवाबी फायरिंग जारी है।
अब तक इस टकराव में 13 से अधिक नागरिकों की मौत हो चुकी है और दोनों देशों के सैनिक भी हताहत हुए हैं। बॉर्डर पूरी तरह से सील कर दिया गया है और राजनयिकों को वापस बुला लिया गया है।
🛕 विवाद की जड़: प्राचीन शिव मंदिर “प्रेआ विहार”
इस संघर्ष का केंद्र है “प्रेआ विहार मंदिर”, जो एक हजार साल पुराना हिंदू मंदिर है, शिव को समर्पित। यह मंदिर यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट भी है और इसकी स्थापत्य कला अद्वितीय है।
हालांकि दोनों देश बौद्ध बहुल हैं, लेकिन इस मंदिर को लेकर उनका रुख अत्यंत भावुक और राष्ट्रवादी है। थाईलैंड का कहना है कि यह मंदिर उनके सांस्कृतिक क्षेत्र में आता है, जबकि कंबोडिया इसे अपने ऐतिहासिक गौरव का हिस्सा मानता है।
मंदिर का इतिहास
यह मंदिर 9वीं से 12वीं सदी के बीच खमेर साम्राज्य द्वारा बनवाया गया था, जब यह साम्राज्य आधुनिक थाईलैंड, लाओस और वियतनाम तक फैला हुआ था। माना जाता है कि इस मंदिर के निर्माण में भारतीय शिल्पियों और वास्तुशास्त्र का भी बड़ा योगदान रहा।
⚖️ अंतरराष्ट्रीय विवाद और कोर्ट केस
इस विवाद पर 1962 में International Court of Justice (ICJ) ने फैसला सुनाया कि मंदिर कंबोडिया के अधिकार क्षेत्र में आता है। मगर, मंदिर के आसपास के क्षेत्र को लेकर अब तक कोई स्पष्ट समाधान नहीं निकला। यही कारण है कि ये क्षेत्र ‘डिस्प्यूटेड ज़ोन’ बना हुआ है।
🪖 मिलिट्री और इकनॉमिक तुलना: कौन कितना ताकतवर?
थाईलैंड और कंबोडिया की सैन्य ताकत और आर्थिक स्थिति में भारी अंतर है।
| क्षेत्र | थाईलैंड | कंबोडिया |
|---|---|---|
| जनसंख्या | 7.2 करोड़ | 1.7 करोड़ |
| GDP (नॉमिनल) | $570 बिलियन | $33 बिलियन |
| डिफेंस बजट | $6 बिलियन | $600 मिलियन |
| एयर फोर्स | F-16, Gripen | चीन निर्मित J-7 |
| नेवी | विकसित | सीमित |
थाईलैंड का सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर न केवल आधुनिक है, बल्कि उसे अमेरिका से खुला समर्थन भी प्राप्त है। वहीं, कंबोडिया की सेना चीन और पाकिस्तान द्वारा दी गई तकनीकी व प्रशिक्षण सहायता पर निर्भर है।
🌏 प्रॉक्सी वॉर: अमेरिका बनाम चीन
यह टकराव केवल दो देशों के बीच नहीं है, बल्कि अमेरिका और चीन की प्रॉक्सी वॉर के रूप में देखा जा रहा है। थाईलैंड जहां एक प्रो-अमेरिका देश है, वहीं कंबोडिया ने पिछले कुछ वर्षों में प्रो-चाइना रुख अपनाया है।
अमेरिका की भूमिका
अमेरिका ने थाईलैंड को F-16 जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमान देने की अनुमति दी है। साथ ही, सैन्य सहायता और खुफिया जानकारी भी साझा की जा रही है। अमेरिका का मानना है कि चीन का प्रभाव अगर कंबोडिया में और बढ़ता है, तो यह पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए खतरा बन सकता है।
चीन की भूमिका भी जान लीजिये
चीन ने हाल ही में कंबोडिया के तटीय क्षेत्र में एक “लॉजिस्टिक बेस” की स्थापना की है। हालांकि चीन का दावा है कि यह बेस सिर्फ प्रशिक्षण और लॉजिस्टिक सपोर्ट के लिए है, लेकिन पश्चिमी देशों का मानना है कि यह एक स्थायी सैन्य ठिकाना बन चुका है।
पाकिस्तान का दखल ये नहीं मानेगा
2019 में पाकिस्तानी सेना ने कंबोडियन सेना को ट्रेनिंग ऑफर की थी। इससे साफ पता चलता है कि चीन के इशारे पर पाकिस्तान भी दक्षिण-पूर्व एशिया में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
📍 कंबोडिया: चाइना का ‘वेसल स्टेट’? पूरी रिपोर्ट –
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कंबोडिया अब एक स्वतंत्र राष्ट्र नहीं रह गया है। चीन की भारी निवेश और सैन्य मौजूदगी ने कंबोडिया को “वेसल स्टेट” बना दिया है।
- चीन ने कंबोडिया में हाइवे, बंदरगाह, एयरपोर्ट और पावर प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश किया है।
- बदले में कंबोडिया ने चीन के खिलाफ कोई भी अंतरराष्ट्रीय आलोचना नहीं की।
- ASEAN जैसे क्षेत्रीय संगठनों में भी कंबोडिया अक्सर चीन के पक्ष में खड़ा दिखाई देता है।
🧭 संघर्ष का वर्तमान और भविष्य जानिए –
हालिया घटनाक्रम:
- मंदिर के पास थाई और कंबोडियन सैनिकों की भिड़ंत।
- एक कंबोडियन सैनिक की मौत के बाद जवाबी हमला।
- थाईलैंड का जवाब: F-16 हमले और आर्टिलरी फायरिंग।
- अब तक दर्जनों नागरिक हताहत, बॉर्डर सील।
- राजनयिक रिश्ते निलंबित।
संभावित भविष्य: कैसा होगा ?
यदि कंबोडिया और थाईलैंड के बीच यह संघर्ष और गहराता है, तो संभावना है कि:
- थाईलैंड, कंबोडिया के तटीय क्षेत्र और मंदिर के इलाके को कब्जे में ले सकता है।
- चीन, कंबोडिया की रक्षा के लिए प्रत्यक्ष मिलिट्री हस्तक्षेप कर सकता है।
- अमेरिका और चीन के बीच तनाव और बढ़ सकता है।
- ASEAN की स्थिरता को गहरा झटका लग सकता है।
🇮🇳 भारत का नजरिया: मंदिर से जुड़ा सांस्कृतिक रिश्ता क्या हो सकता है ?
यह ध्यान देने वाली बात है कि विवादित प्रेआ विहार मंदिर हिंदू संस्कृति का हिस्सा है, और इसके निर्माण में भारतीय कारीगरों की भूमिका मानी जाती है। भारत इस क्षेत्रीय संघर्ष में सीधा पक्ष नहीं है, लेकिन सांस्कृतिक दृष्टिकोण से इसकी महत्ता भारत के लिए विशेष है।
भारत के कई पुरातत्वविद और इतिहासकार इस मंदिर को “भारत की सांस्कृतिक धरोहर का विस्तार” मानते हैं। इसलिए यह संघर्ष भारत के इतिहास प्रेमियों के लिए भी चिंता का विषय बन चुका है।
✍️ निष्कर्ष: क्या यह प्रॉक्सी वॉर वर्ल्ड वॉर का बीज बनेगी? जानिए –
यह संघर्ष केवल थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमित नहीं रहेगा। यह अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती वैश्विक तनातनी का एक और उदाहरण है।
कंबोडिया जैसे छोटे देशों का एक महाशक्ति के अधीन हो जाना — और थाईलैंड का अमेरिका से खुला सैन्य समर्थन — यह सब संकेत देता है कि दक्षिण-पूर्व एशिया एक बड़े भू-राजनीतिक भूचाल की ओर बढ़ रहा है।
अगर दोनों देशों में शांति स्थापना नहीं होती, तो यह विवाद बहुत जल्द एक “रीजनल वॉर” में बदल सकता है, जिसका असर भारत सहित पूरे एशिया पर पड़ेगा।
लेख स्रोत:
- BBC, Reuters, Al Jazeera रिपोर्ट्स
- United Nations ICJ दस्तावेज
- SIPRI मिलिट्री डाटाबेस
- Static Study विश्लेषण टीम
📌 आपका क्या विचार है इस युद्ध के बारे में? क्या चीन और अमेरिका के बीच ये प्रॉक्सी वॉर दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की तरफ धकेल रही है? नीचे कमेंट करके जरूर बताएं।
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📰 लेख: Manoj Kumar (Senior Analyst) Ajit Mishra (Asisstent Analyst) Arpit Tiwari (Editor,Writer) ( Static Study)
🗓️ प्रकाशन तिथि: 27 जुलाई 2025











