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Sheikh Hasina Death Sentence Shocks the Nation

Sheikh Hasina death sentence

 

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लेखक: Statix Study डेस्क |
अपडेटेड: 18 नवंबर, 2025

शेख हसीना को मौत की सजा: बांग्लादेश में खूनी संघर्ष का अंत या नई शुरुआत?

Sheikh Hasina death sentence

Sheikh Hasina death sentence

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को विशेष न्यायाधिकरण ने सुनाई मौत की सजा। (प्रतीकात्मक चित्र)

ढाका/नई दिल्ली: बांग्लादेश के इतिहास में सोमवार, 17 नवंबर 2025 का दिन एक काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। बांग्लादेश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (International Crimes Tribunal – ICT) ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को उनकी अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई है।

यह फैसला पिछले साल (जुलाई-अगस्त 2024) हुए छात्र आंदोलन के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा की गई कथित “नरसंहार” और “मानवता के खिलाफ अपराधों” के लिए सुनाया गया है। हसीना के साथ उनके पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी मृत्युदंड दिया गया है।

1. ऐतिहासिक फैसला: कोर्ट ने क्या कहा?

ढाका स्थित न्यायाधिकरण के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मो. गोलम मुर्तजा मोजुमदार ने फैसला सुनाते हुए कहा कि शेख हसीना, जो उस समय प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री थीं, ने अपनी सत्ता बचाने के लिए निहत्थे नागरिकों पर “घातक बल” प्रयोग करने का आदेश दिया।

फैसले की मुख्य बातें (Key Highlights):

  • सजा: शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री को फाँसी (Death Penalty)।
  • अन्य दोषी: पूर्व पुलिस महानिरीक्षक (IGP) अब्दुल्ला अल-मामून को 5 साल की जेल (उन्होंने गुनाह कबूल कर सरकारी गवाह बनने का फैसला किया)।
  • संपत्ति जब्त: कोर्ट ने दोषियों की संपत्ति जब्त करने का आदेश दिया है।
  • टिप्पणी: कोर्ट ने इसे “सुनियोजित राज्य-प्रायोजित हत्या” करार दिया है।

2. शेख हसीना पर क्या थे आरोप?

अभियोजन पक्ष ने शेख हसीना को जुलाई-अगस्त 2024 की हिंसा का “मास्टरमाइंड” बताया। संयुक्त राष्ट्र (UN) की रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान लगभग 1,400 लोग मारे गए थे।

उन पर मुख्य रूप से तीन गंभीर आरोप साबित हुए:

  1. नरसंहार के लिए उकसाना: सार्वजनिक भाषणों में प्रदर्शनकारी छात्रों को “रजाकार” (देशद्रोही) कहकर उनके खिलाफ हिंसा भड़काना।
  2. गोली चलाने का आदेश: पुलिस और सेना को प्रदर्शनकारियों पर “Shoot-on-Sight” (देखते ही गोली मारने) का आदेश देना।
  3. रोकथाम में विफलता: देश के प्रमुख होने के नाते मौतों को रोकने के लिए कोई कदम न उठाना।

 

जुलाई 2024 में ढाका की सड़कों पर उतरे छात्र, जिसे ‘जुलाई क्रांति’ का नाम दिया गया।

3. भारत के लिए धर्मसंकट: क्या भारत हसीना को सौंपेगा?

वर्तमान में 78 वर्षीय शेख हसीना भारत में निर्वासित जीवन बिता रही हैं (संभावित रूप से दिल्ली के पास एक सुरक्षित स्थान पर)। इस फैसले के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारत से उन्हें तुरंत वापस भेजने की मांग की है।

क्या कहता है प्रत्यर्पण समझौता (Extradition Treaty)?

भारत और बांग्लादेश के बीच 2013 में प्रत्यर्पण संधि हुई थी। हालाँकि, इसमें एक महत्वपूर्ण पेंच है:

“अनुच्छेद 6 (Article 6) के तहत, यदि अपराध ‘राजनीतिक प्रकृति’ (Political Nature) का है, तो प्रत्यर्पण से इनकार किया जा सकता है।”

भारत के पास शेख हसीना को न सौंपने के लिए मजबूत तर्क हैं:

  • राजनीतिक प्रतिशोध: भारत यह तर्क दे सकता है कि यह फैसला राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है।
  • सुरक्षा का खतरा: बांग्लादेश में हसीना की जान को स्पष्ट खतरा है।
  • लंबी कानूनी प्रक्रिया: अगर भारत सरकार चाहे भी, तो हसीना भारतीय अदालतों में इस फैसले को चुनौती दे सकती हैं, जो एक लंबी प्रक्रिया होगी।

भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने अभी तक इस पर सधी हुई प्रतिक्रिया दी है, यह कहते हुए कि वे स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

4. जुलाई क्रांति: जब ढाका खून से लाल हुआ

यह सब जून 2024 में शुरू हुआ जब छात्रों ने सरकारी नौकरियों में कोटा सिस्टम (Quota System) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन  शुरू किया। शुरुआत में शांतिपूर्ण रहे इस आंदोलन ने तब हिंसक रूप ले लिया जब हसीना की पार्टी ‘अवामी लीग’ के छात्र संगठन ने प्रदर्शनकारियों पर हमला किया। Sheikh Hasina news today

घटनाक्रम एक नजर में:

  • 15 जुलाई 2024: ढाका विश्वविद्यालय में खूनी झड़पें शुरू।
  • 20 जुलाई 2024: सरकार ने कर्फ्यू लगाया और इंटरनेट बंद किया।
  • 4 अगस्त 2024: एक ही दिन में 100 से अधिक लोगों की मौत।
  • 5 अगस्त 2024: “लॉन्ग मार्च टू ढाका” (Long March to Dhaka) के दबाव में शेख हसीना को इस्तीफा देकर हेलिकॉप्टर से भारत भागना पड़ा।

5. अब आगे क्या? (Conclusion)

शेख हसीना को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद बांग्लादेश की राजनीति में अस्थिरता और बढ़ सकती है। अवामी लीग के समर्थकों और अंतरिम सरकार के बीच संघर्ष की आशंका बनी हुई है।

Statix Study का विश्लेषण: Sheikh Hasina news todayव

  • बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताकतों का प्रभाव बढ़ सकता है।
  • भारत और बांग्लादेश के द्विपक्षीय व्यापार पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है।
  • दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।

क्या शेख हसीना कभी वापस बांग्लादेश लौटेंगी? या यह फैसला केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा? यह आने वाला वक्त और कूटनीति ही तय करेगी।

Sheikh Hasina news today


(डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध समाचार स्रोतों और तथ्यों पर आधारित है। Statix Study किसी भी राजनीतिक विचारधारा का समर्थन नहीं करता।)

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