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क्वांटम कंप्यूटिंग क्या है: भविष्य की सबसे ताकतवर तकनीक,

क्वांटम कंप्यूटिंग क्या है

क्वांटम कंप्यूटिंग: भविष्य की सबसे ताकतवर तकनीक, जो दुनिया को हमेशा के लिए बदल देगी

 

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प्रस्तावना: एक नई तकनीकी क्रांति की दहलीज पर दुनिया

कल्पना कीजिए एक ऐसे कंप्यूटर की, जो उन समस्याओं को मिनटों में हल कर दे,

जिन्हें आज के सबसे शक्तिशाली सुपरकंप्यूटर को हल करने में हज़ारों साल लग जाएँगे।

कल्पना कीजिए एक ऐसी मशीन की, जो कैंसर और अल्जाइमर जैसी बीमारियों के लिए नई दवाएँ कुछ ही दिनों में खोज सके।

यह कोई विज्ञान-कथा नहीं, बल्कि एक हकीकत है जो दरवाज़े पर दस्तक दे रही है। इसका नाम है – क्वांटम कंप्यूटिंग (Quantum Computing)

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ब्लॉकचेन के बाद, क्वांटम कंप्यूटिंग को अगली सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति माना जा रहा है।

भारत सहित दुनिया भर की सरकारें और कंपनियाँ इस तकनीक में अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं,

क्योंकि वे जानती हैं कि जो भी इस दौड़ में आगे निकलेगा, वही भविष्य पर राज करेगा।

आइए, सरल भाषा में समझते हैं कि यह “जादुई” तकनीक आखिर है क्या और यह हमारे जीवन को कैसे प्रभावित करेगी।


आखिर ये क्वांटम कंप्यूटिंग बला क्या है?

इसे समझने के लिए, पहले अपने लैपटॉप या फ़ोन के बारे में सोचिए। ये सभी क्लासिकल कंप्यूटर हैं और ‘बिट्स’ (Bits) पर काम करते हैं। एक बिट एक छोटे से स्विच की तरह है, जो या तो 0 (ऑफ) हो सकता है या 1 (ऑन)। बस यही दो संभावनाएं हैं।

वहीं दूसरी ओर, क्वांटम कंप्यूटर ‘क्यूबिट्स’ (Qubits) का इस्तेमाल करते हैं, जो क्वांटम फिजिक्स के अजीब लेकिन शक्तिशाली नियमों पर चलते हैं। क्यूबिट्स के पास दो जादुई शक्तियाँ होती हैं:

  1. सुपरपोज़िशन (Superposition): एक क्यूबिट एक ही समय में 0 और 1 दोनों हो सकता है। इसे समझने के लिए एक घूमते हुए सिक्के की कल्पना करें। जब तक सिक्का हवा में घूम रहा है, वह एक ही समय में हेड्स और टेल्स दोनों है। जब वह गिरेगा, तब किसी एक स्थिति (हेड्स या टेल्स) में आएगा। सुपरपोज़िशन क्यूबिट्स को एक साथ कई गणनाएँ करने की शक्ति देता है।
  2. एंटैंगलमेंट (Entanglement): यह क्वांटम फिजिक्स का सबसे रहस्यमयी सिद्धांत है, जिसे आइंस्टीन ने “स्पूकी एक्शन एट ए डिस्टेंस” (दूर से होने वाली डरावनी हरकत) कहा था। इसमें दो क्यूबिट्स को इस तरह जोड़ा जाता है कि वे एक-दूसरे का “जुड़वाँ” बन जाते हैं। अगर एक क्यूबिट हज़ारों किलोमीटर दूर भी हो, तो भी जैसे ही आप एक की स्थिति (0 या 1) को मापते हैं, दूसरे की स्थिति तुरंत पता चल जाती है।

तो इसका मतलब क्या हुआ?

इन दो शक्तियों की वजह से, जहाँ एक 4-बिट का क्लासिकल कंप्यूटर 16 ($2^4$) संभावनाओं में से एक बार में केवल एक को प्रोसेस कर सकता है, वहीं एक 4-क्यूबिट का क्वांटम कंप्यूटर सभी 16 संभावनाओं को एक साथ प्रोसेस कर सकता है। जैसे-जैसे क्यूबिट्स की संख्या बढ़ती है, यह शक्ति तेजी से बढ़ती जाती है।

 


क्वांटम और क्लासिकल कंप्यूटिंग में फर्क: चाबी का गुच्छा और मास्टर-की

इसे एक और सरल उदाहरण से समझते हैं:

  • क्लासिकल कंप्यूटर: कल्पना कीजिए कि आपके पास एक बहुत बड़ा चाबियों का गुच्छा है और आपको एक ताला खोलना है। क्लासिकल कंप्यूटर एक-एक करके हर चाबी को ताले में लगाकर देखेगा, जब तक सही चाबी नहीं मिल जाती। इसमें बहुत समय लग सकता है।
  • क्वांटम कंप्यूटर: क्वांटम कंप्यूटर अपनी सुपरपोज़िशन की शक्ति से मानो सारी चाबियों को एक ही बार में ताले में लगाकर देख लेता है और तुरंत सही चाबी खोज निकालता है।
फ़ीचरक्लासिकल कंप्यूटरक्वांटम कंप्यूटर
मूल इकाईबिट (0 या 1)क्यूबिट (0, 1, और दोनों एक साथ)
डेटा प्रोसेसिंगएक समय में एक गणना (Sequential)एक साथ लाखों गणनाएँ (Parallel)
क्षमतासीमित और रैखिक (Linear)अविश्वसनीय और घातांकीय (Exponential)
उपयोगरोज़मर्रा के काम, ईमेल, गेमिंगजटिल सिमुलेशन, दवा खोज, AI

क्वांटम कंप्यूटिंग क्यों है इतनी ज़रूरी? यह कहाँ काम आएगी?

क्या  तकनीक सिर्फ कंप्यूटर को तेज़ बनाने के बारे में नहीं है,।

यह उन कामों को करने के बारे में है जो आज असंभव हैं।

  1. स्वास्थ्य और दवा उद्योग: नई दवाएँ बनाने में सालों लग जाते हैं क्योंकि वैज्ञानिकों को लाखों मॉलिक्यूलर
  2. कॉम्बिनेशन का परीक्षण करना पड़ता है। क्वांटम कंप्यूटर इन मॉलिक्यूल्स का सटीक सिमुलेशन करके कुछ ही दिनों
  3. में सबसे प्रभावी दवा खोज सकते हैं। इससे कैंसर, अल्जाइमर और अन्य लाइलाज बीमारियों का इलाज संभव हो सकता है।
  4. साइबर सुरक्षा: आज का इंटरनेट एन्क्रिप्शन (जैसे RSA) पर चलता है, जिसे तोड़ना क्लासिकल कंप्यूटर के लिए लगभग असंभव है।
  5. लेकिन एक शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटर इसे मिनटों में तोड़ सकता है, जिससे बैंकिंग, डेटा सुरक्षा और सैन्य संचार खतरे में पड़ सकते हैं।
  6. इसीलिए वैज्ञानिक “पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी” पर काम कर रहे हैं, यानी ऐसे नए एन्क्रिप्शन सिस्टम जो क्वांटम हमलों से सुरक्षित हों।
  7. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग: AI को बेहतर बनाने के लिए भारी मात्रा में डेटा को प्रोसेस करना पड़ता है।
  8. क्वांटम कंप्यूटर इस प्रक्रिया को हज़ारों गुना तेज़ कर देंगे, जिससे AI और भी ज़्यादा स्मार्ट और सक्षम बनेगा।
  9. वित्तीय मॉडलिंग: शेयर बाज़ार और अर्थव्यवस्था की भविष्यवाणी करना बेहद जटिल है।
  10. क्वांटम कंप्यूटर अधिक सटीक वित्तीय मॉडल बनाकर आर्थिक संकटों की भविष्यवाणी करने और निवेश के बेहतर अवसर खोजने में मदद कर सकते हैं।
  11. जलवायु परिवर्तन: जलवायु परिवर्तन को समझने और रोकने के लिए सटीक मौसम पैटर्न और
  12. पर्यावरणीय सिमुलेशन की आवश्यकता होती है। क्वांटम कंप्यूटर इस क्षेत्र में अभूतपूर्व गणनाएँ कर सकते हैं।

दुनिया में क्वांटम की दौड़: कौन है सबसे आगे?

यह 21वीं सदी की नई स्पेस रेस है, जहाँ वर्चस्व की लड़ाई छिड़ी हुई है।

  • अमेरिका: Google, IBM और Microsoft जैसी कंपनियाँ इस दौड़ में सबसे आगे हैं।
  • 2019 में, गूगल ने अपने 54-क्यूबिट सायकामोर (Sycamore) प्रोसेसर से “क्वांटम सुप्रीमेसी” का दावा किया था।
  • यानी एक ऐसी गणना की जो उस समय के सबसे तेज़ सुपरकंप्यूटर के लिए असंभव थी। वहीं, IBM ने हाल ही में 1000+ क्यूबिट्स वाले प्रोसेसर भी पेश किए हैं।
  • चीन: चीन इस तकनीक पर पानी की तरह पैसा बहा रहा है, खासकर क्वांटम कम्युनिकेशन और सैटेलाइट के क्षेत्र में। वह इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद अहम मानता है।
  • भारत: भारत भी इस दौड़ में पीछे नहीं है। सरकार ने इस महत्व को समझते हुए एक महत्वाकांक्षी मिशन शुरू किया है।

 


क्वांटम की दौड़ में भारत कहाँ है?

भारत ने क्वांटम तकनीक में आत्मनिर्भर बनने के लिए 2023 में । राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (National Quantum Mission – NQM) को मंजूरी दी।

  • बजट: इस मिशन के लिए सरकार ने ₹6,003 करोड़ का भारी-भरकम बजट आवंटित किया है।
  • लक्ष्य: मिशन का लक्ष्य अगले 8 वर्षों में 50 से 1000 क्यूबिट वाले क्वांटम कंप्यूटर विकसित करना है।
  • प्रमुख संस्थान: IISc बेंगलुरु, IITs, और TIFR जैसे प्रमुख संस्थान क्वांटम हार्डवेयर और एल्गोरिदम पर तेजी से काम कर रहे हैं।
  • फोकस क्षेत्र: भारत का फोकस क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम कम्युनिकेशन, क्वांटम सेंसिंग
  • और क्वांटम मैटेरियल्स पर है, ताकि रक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल इंडिया को मजबूती मिल सके।

क्या यह राह आसान है? चुनौतियाँ

क्वांटम कंप्यूटर बनाना बेहद मुश्किल काम है। इसकी मुख्य चुनौतियाँ हैं:

  1. बेहद नाजुक क्यूबिट्स (Error Correction): क्यूबिट्स बाहरी वातावरण (जैसे तापमान या कंपन) से बहुत जल्दी प्रभावित हो जाते हैं, जिससे गणनाओं में गलतियाँ (Noise) आ जाती हैं। इन्हें स्थिर रखना सबसे बड़ी चुनौती है।
  2. अत्यधिक ठंडक की ज़रूरत: क्यूबिट्स को सही से काम करने के लिए ब्रह्मांड के सबसे ठंडे तापमान के करीब, यानी -273 डिग्री सेल्सियस के आसपास रखना पड़ता है। इसके लिए विशाल और महँगे कूलिंग सिस्टम (Cryostats) की ज़रूरत होती है।
  3. उच्च लागत: रिसर्च और निर्माण में अरबों डॉलर का खर्च आता है, जो इसे कुछ देशों और कंपनियों तक ही सीमित रखता है।
  4. सॉफ्टवेयर और एल्गोरिदम: अभी भी क्वांटम कंप्यूटर के लिए बहुत कम सॉफ्टवेयर और एल्गोरिदम विकसित हुए हैं।

विशेषज्ञों की राय

“क्वांटम कंप्यूटिंग मानवता के लिए आग या बिजली की खोज जितना ही महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी साबित होगा।”

— सुंदर पिचाई (CEO, Google)

“हम एक ऐसे मोड़ पर हैं जहाँ क्वांटम कंप्यूटर विज्ञान की समस्याओं से निकलकर वास्तविक दुनिया की समस्याओं को हल करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।”

— अरविंद कृष्णा (CEO, IBM)

निष्कर्ष: एक नए युग की शुरुआत

क्वांटम कंप्यूटिंग कोई ऐसी चीज़ नहीं है जो आपके लैपटॉप या स्मार्टफोन की जगह लेगी। यह एक विशेष उपकरण है

जिसे मानवता की सबसे बड़ी और जटिल समस्याओं को हल करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

यह तकनीक अभी अपने शुरुआती चरण में है, लेकिन इसकी क्षमताएँ अनंत हैं।

भारत का राष्ट्रीय क्वांटम मिशन एक सही दिशा में उठाया गया कदम है।

जो देश को भविष्य की इस सबसे शक्तिशाली

तकनीक में एक वैश्विक खिलाड़ी बना सकता है।

यह कहना गलत नहीं होगा कि हम एक ऐसे नए युग की दहलीज पर खड़े हैं,

जहाँ क्वांटम कंप्यूटिंग विज्ञान, स्वास्थ्य और उद्योग की परिभाषा को हमेशा के लिए बदल कर रख देगी।


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