क्या है ये नाटो के Article’s आईए जानते है-संरचना, अनुच्छेद और बदलती वैश्विक भूमिका-
उत्तर प्रदेश -सीतापुर – team- staticstudy @manojkumar,@ajeetmishra , @erarpittiwari
उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) दुनिया का सबसे बड़ा सैन्य गठबंधन है। इसकी स्थापना 1949 में हुई थी। आज इसमें 32 सदस्य देश शामिल हैं। नाटो का मुख्य उद्देश्य सामूहिक रक्षा है। यदि किसी सदस्य देश पर हमला होता है, तो बाकी सभी देश उसकी रक्षा के लिए खड़े होते हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!इस लेख में हम नाटो की संरचना, इसके अनुच्छेद, रणनीतिक महत्व और वर्तमान वैश्विक स्थिति में इसकी भूमिका पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
नाटो की स्थापना
- नाटो की स्थापना 4 अप्रैल 1949 को वॉशिंगटन संधि के तहत हुई।
- प्रारंभिक सदस्य 12 देश थे, जिनमें अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस और अन्य पश्चिमी यूरोपीय राष्ट्र शामिल थे।
- इसका उद्देश्य सोवियत संघ के बढ़ते प्रभाव को रोकना था।
नाटो के मुख्य अनुच्छेद
अटलांटिक सैन्य संगठन संधि में कुल 14 अनुच्छेद हैं। इनमें से कुछ विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।
Article 1
- विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से हल करने का वादा।
- संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का पालन।
पैरा 2
- सदस्य देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक सहयोग को बढ़ावा।
- लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा।
खंड 3
- सामूहिक सुरक्षा के लिए हर देश की क्षमता को मजबूत करना।
- सैन्य और आर्थिक रूप से सहयोग।
लेखांश 4
- यदि किसी देश को खतरा महसूस हो, तो सभी सदस्य आपस में परामर्श करेंगे।
- यह अनुच्छेद सामूहिक निर्णय प्रक्रिया को दर्शाता है।
अंश 5 (सबसे महत्वपूर्ण)
- सामूहिक रक्षा का आधार।
- किसी एक सदस्य पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा।
- 9/11 हमले के बाद पहली बार इस अनुच्छेद का उपयोग किया गया।
अनुच्छेद 6
- अनुच्छेद 5 की भौगोलिक सीमा को परिभाषित करता है।
- यूरोप, उत्तरी अमेरिका और नाटो क्षेत्र के बाहर के कुछ द्वीप शामिल।
परिक्षेद 10
- नए सदस्य जोड़ने की प्रक्रिया।
- लोकतांत्रिक मूल्यों को मानने वाले यूरोपीय देशों को सदस्य बनाया जा सकता है।
अनुच्छेद 13
- कोई भी सदस्य संगठन से बाहर हो सकता है।
- इसके लिए एक साल पहले नोटिस देना होता है।
उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन की संरचना
- नॉर्थ अटलांटिक काउंसिल: निर्णय लेने वाली सबसे ऊँची संस्था।
- सेक्रेटरी जनरल: राजनीतिक नेतृत्व करता है।
- मिलिट्री कमेटी: सैन्य रणनीति बनाती है।
- स्ट्रैटेजिक कमांड्स: यूरोप और अमेरिका में अलग-अलग कमांड सेंटर।
NATO सैन्य गठबंधनका विस्तार
- 1952 में ग्रीस और तुर्की शामिल हुए।
- 1955 में पश्चिम जर्मनी।
- 1999 के बाद से कई पूर्व सोवियत देशों को सदस्य बनाया गया।
- 2023 में फिनलैंड और 2024 में स्वीडन शामिल हुए।
नाटो की सैन्य क्षमता
- कुल मिलाकर नाटो के पास दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति है।
- 30 लाख से अधिक सक्रिय सैनिक।
- अमेरिका अकेले नाटो के कुल सैन्य खर्च का 70 प्रतिशत वहन करता है।
- आधुनिक हथियार, न्यूक्लियर डिटरेंस और साइबर सुरक्षा क्षमताएं।
पश्चिमी सैन्य संगठन और रूस
- रूस हमेशा नाटो के विस्तार का विरोध करता रहा है।
- यूक्रेन युद्ध में नाटो ने सीधे सैनिक नहीं भेजे, लेकिन हथियार और आर्थिक मदद दी।
- नाटो की रणनीति रूस को रोकने और पूर्वी यूरोप को सुरक्षित रखने पर केंद्रित है।
नाटो और भारत
- भारत नाटो का सदस्य नहीं है।
- भारत ने हमेशा रणनीतिक स्वतंत्रता की नीति अपनाई है।
- लेकिन हाल के वर्षों में भारत और नाटो देशों के बीच सहयोग बढ़ा है, खासकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में।
- भारत अमेरिका और फ्रांस जैसे देशों के साथ रक्षा सहयोग मजबूत कर रहा है।
चुनौतियां
- सदस्य देशों के बीच खर्च और जिम्मेदारियों को लेकर मतभेद।
- साइबर सुरक्षा और हाइब्रिड वॉरफेयर जैसे नए खतरे।
- चीन के बढ़ते प्रभाव से निपटने की रणनीति पर असहमति।
NATO का भविष्य
- संगठन अब केवल यूरोप तक सीमित नहीं है।
- एशिया और इंडो-पैसिफिक में भी इसकी भूमिका बढ़ रही है।
- आने वाले समय में नाटो का ध्यान साइबर युद्ध, स्पेस डिफेंस और नई तकनीकों पर होगा।
निष्कर्ष
नाटो केवल एक सैन्य गठबंधन नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक और आर्थिक सहयोग का भी माध्यम है। अनुच्छेद 5 इसे विश्व का सबसे मजबूत सामूहिक सुरक्षा संगठन बनाता है। बदलते अंतरराष्ट्रीय माहौल में नाटो की भूमिका और भी अहम हो गई है।
नेपाल में संसद और सुप्रीम कोर्ट जलाए गए
Russia cancer vaccine क्या सच में 100% सफलता मिली है?
आज चंद्र ग्रहण भारत में दिखेगा वैज्ञानिक, धार्मिक और ज्योतिषीय प्रभावों
हज़रतबल दरगाह विवाद: राष्ट्रीय प्रतीक पट्टिका पर बवाल और राजनीतिक










