Static Study

News with Static Study

Advertisement

MGNREGA का नया नाम और 125 दिन की गारंटी।

MGNREGA का नया नाम और 125 दिन की गारंटी।
MGNREGA का नया नाम और 125 दिन की गारंटी।

MGNREGA का नया नाम और 125 दिन की गारंटी।

 

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

ऐतिहासिक बदलाव: MGNREGA की जगह अब ‘VB-G RAM G’ एक्ट, ग्रामीण परिवारों को मिलेगी 125 दिन रोजगार की गारंटी

संपादकीय नोट: 22 दिसंबर, 2025 –

भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुधार में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत, MGNREGA का नया नाम अब चर्चा का विषय बन गया है।

इतिहास में आज का दिन एक बड़े बदलाव के रूप में दर्ज किया गया है।

लगभग दो दशकों तक ग्रामीण भारत की जीवनरेखा रही ‘मनरेगा’ योजना

को अब MGNREGA का नया नाम एक नए, अधिक व्यापक और भविष्योन्मुखी

अधिनियम द्वारा प्रतिस्थापित किया जा रहा है। यह बदलाव सिर्फ नाम का नहीं,

बल्कि दृष्टिकोण का है। staticstudy.com की इस विशेष रिपोर्ट में जानें क्या है

नया ‘VB-G RAM G’ एक्ट और इसका ग्रामीण भारत पर क्या असर होगा।

नई दिल्ली: भारत के ग्रामीण रोजगार परिदृश्य में एक व्यापक और ऐतिहासिक

नीतिगत बदलाव को अंतिम रूप दे दिया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उस विधेयक

को अपनी मंजूरी दे दी है। यह विधेयक महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी

अधिनियम (MGNREGA) को आधिकारिक रूप से प्रतिस्थापित करेगा।

इस नए अधिनियम का नाम ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’

या संक्षेप में ‘VB-G RAM G’ (वीबी-जी राम जी) रखा गया है।

अब, MGNREGA का नया नाम इसे नया रूप दे रहा है।

यह कदम केंद्र सरकार के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

इस नए कानून का सबसे बड़ा और तत्काल प्रभाव यह है कि

अब ग्रामीण परिवारों के लिए वार्षिक रोजगार गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है।

मनरेगा का युग और बदलाव की जरूरत

वर्ष 2005 में शुरू किया गया मनरेगा (मूल रूप से नरेगा) दुनिया का सबसे बड़ा सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम था।

इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक प्रत्येक परिवार को

एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों का गारंटीकृत मजदूरी रोजगार प्रदान करके

आजीविका सुरक्षा को बढ़ाना था। वह अधिनियम, जिसे अब MGNREGA का नया नाम मिल रहा है,

हजारों लोगों की मदद कर रहा है।

पिछले दो दशकों में, मनरेगा ने सूखे, महामारी (जैसे कोविड-19 के दौरान रिवर्स माइग्रेशन) और

आर्थिक संकट के समय में ग्रामीण आबादी के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच के रूप में काम किया।

हालांकि, समय के साथ, केवल ‘गड्ढे खोदने’ जैसे कार्यों, परिसंपत्ति निर्माण की निम्न गुणवत्ता

और भुगतान में देरी जैसी आलोचनाएं भी सामने आईं। सरकार का मानना है कि बदलते भारत

की बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए एक नए ढांचे की आवश्यकता थी।

यह ढांचा केवल ‘रोजगार’ तक सीमित न हो, बल्कि ‘आजीविका’ और ‘कौशल विकास’ पर भी केंद्रित हो।

क्या है नया ‘VB-G RAM G’ एक्ट?

जैसा कि नाम से स्पष्ट है, ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’

का लक्ष्य भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में ग्रामीण श्रमशक्ति का उपयोग करना है।

यह नया एक्ट मनरेगा के मूल सिद्धांतों को बनाए रखते हुए उसमें कई महत्वपूर्ण सुधार जोड़ता है।

MGNREGA का नया नाम इस नए अधिनियम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

नए एक्ट की प्रमुख विशेषताएं:

  • 125 दिनों की गारंटी: सबसे महत्वपूर्ण बदलाव रोजगार के दिनों में वृद्धि है।
  • अब प्रत्येक ग्रामीण परिवार को साल में 100 के बजाय 125 दिनों के अकुशल
  • श्रम की कानूनी गारंटी मिलेगी। यह ग्रामीण आय में सीधी 25% की वृद्धि की संभावना
  • पैदा करता है। MGNREGA का नया नाम इस वृद्धि को सही ठहराने में मदद कर सकता है।
  • ‘आजीविका’ पर जोर (Livelihood Focus): मनरेगा का मुख्य फोकस ‘रोजगार’ था, जबकि VB-G RAM G का फोकस ‘आजीविका’ पर है। इसका मतलब है कि सरकार केवल दिहाड़ी मजदूरी देने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि ग्रामीण नागरिकों को ऐसे कौशल सिखाना चाहती है जिससे वे भविष्य में स्वरोजगार या बेहतर नौकरी पा सकें।
  • टिकाऊ परिसंपत्ति निर्माण (Sustainable Asset Creation): नए एक्ट के तहत, उन कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी जो जलवायु परिवर्तन से निपटने, जल संरक्षण और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में मदद करते हैं। सिर्फ कच्ची सड़कें बनाने के बजाय, अब फोकस पक्के निर्माण और दीर्घकालिक उपयोग वाली संपत्तियों पर होगा।
  • कौशल विकास का एकीकरण: नए मिशन के तहत, 125 दिनों के रोजगार में से कुछ दिन अनिवार्य रूप से ‘कौशल प्रशिक्षण’ (Skill Training) के लिए समर्पित किए जा सकते हैं, जिसके लिए भी श्रमिकों को भुगतान किया जाएगा।

कार्यान्वयन और चुनौतियां

इतने बड़े बदलाव को ज़मीन पर उतारना आसान नहीं होगा। ‘VB-G RAM G’ की सफलता पूरी

तरह से इसके प्रभावी कार्यान्वयन पर निर्भर करेगी। इस अधिनियम में MGNREGA का नया नाम महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

डिजिटल एकीकरण और पारदर्शिता: नए एक्ट में पारदर्शिता लाने के लिए पूरी प्रक्रिया को डिजिटल

बनाने पर जोर दिया गया है। श्रमिकों की हाजिरी (जियो-टैगिंग के माध्यम से), मजदूरी का भुगतान

(सीधे बैंक खातों में – DBT), और कार्यों की निगरानी पूरी तरह से तकनीकी आधारित होगी।

यह भ्रष्टाचार और ‘घोस्ट वर्कर्स’ (फर्जी मजदूरों) की समस्या को कम करने में मदद करेगा।

फंडिंग की चुनौती: 100 से 125 दिन रोजगार बढ़ाने का सीधा मतलब है कि सरकार के खजाने

पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा। बजट में इसके लिए पर्याप्त आवंटन सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती होगी।

इसके अलावा, राज्यों के साथ समन्वय बनाना भी महत्वपूर्ण होगा। कार्यान्वयन की मुख्य जिम्मेदारी उन्हीं की होती है।

निष्कर्ष: ग्रामीण भारत के लिए एक नई सुबह?

‘VB-G RAM G’ एक्ट का आगमन भारतीय सामाजिक नीति में एक निर्णायक मोड़ है। यह दर्शाता है कि सरकार अब ग्रामीण आबादी को केवल ‘लाभार्थी’ के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में ‘भागीदार’ के रूप में देख रही है। 125 दिनों की बढ़ी हुई गारंटी निश्चित रूप से ग्रामीण संकट को कम करने में मदद करेगी। MGNREGA का नया नाम अच्छी तरह से इस परिवर्तन का संकेत दे सकता है।

हालांकि, यह देखना बाकी है कि क्या यह नया मिशन मनरेगा की पुरानी कमियों—जैसे भुगतान में देरी और भ्रष्टाचार—को दूर कर पाएगा। यदि इसे सही भावना और तकनीकी दक्षता के साथ लागू किया गया, तो ‘VB-G RAM G’ वास्तव में ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने और ‘विकसित भारत’ की नींव रखने में एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

© 2025 StaticStudy.com | सभी अधिकार सुरक्षित।