
Kyo bhavuk huye PM
रामलला के समक्ष नतमस्तक सत्ता: जब ध्वज फहराते समय कांप उठे पीएम मोदी के हाथ
Lucknow: Uttar Pradesh Special Report; By team STATIC STUDY In the latest events in Lucknow, many are questioning kyo bhavuk huye PM during his recent visit.
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!22 जनवरी 2024 का सूर्योदय भारत के इतिहास में सामान्य नहीं था। सरयू के तट पर एक नए युग का
आरंभ हो रहा था। अयोध्या नगरी दीयों और फूलों से सजी थी, लेकिन सबकी निगाहें
उस नवनिर्मित भव्य राम मंदिर के गर्भगृह पर टिकी थीं, जहाँ 500 वर्षों के अनवरत संघर्ष,
बलिदान और प्रतीक्षा का अंत होने जा रहा था। इस ऐतिहासिक क्षण के केंद्र में थे भारत के
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो उस दिन एक शासक नहीं,
बल्कि एक ‘प्रधान सेवक’ और रामभक्त के रूप में वहां उपस्थित थे।
वो भावुक क्षण: कांपते हाथों में सनातन का भार
जब प्रधानमंत्री मोदी गर्भगृह में प्रवेश कर रहे थे,
तो उनके चेहरे पर एक गंभीर शांति थी। यह वह शांति थी, जिसे 11 दिनों के
कठोर अनुष्ठान ने और भी गहरा कर दिया था। लेकिन वह पल सबसे मर्मस्पर्शी था,
जब वे अनुष्ठान की विधि पूरी कर रहे थे और सनातन धर्म का ध्वज (प्रतीकात्मक रूप से)
और पूजा सामग्री अर्पित कर रहे थे।
प्रत्यक्षदर्शियों और करोडों दर्शकों ने टीवी स्क्रीन पर महसूस किया कि उस क्षण पीएम मोदी के हाथ स्थिर
नहीं थे। उनमें एक कंपन था। यह कंपन किसी भय का नहीं था, और न ही यह कोई शारीरिक कमजोरी
थी। यह वह ‘सात्विक कंपन’ था जो तब उत्पन्न होता है। जब एक भक्त अपने आराध्य के साक्षात दर्शन करता है।
“जब उन्होंने ध्वज थाम रखा था, तो वह केवल कपड़ा या धातु नहीं था। वह 500 साल पुरानी
उन पीढ़ियों की चीखें, उम्मीदें और प्रार्थनाएं थीं, जिनका वजन उस समय पीएम मोदी के हाथों में था।
जब जिम्मेदारी और भक्ति का ज्वार उमड़ता है, तो शरीर का कांपना स्वाभाविक है। वह कंपन, उनकी अंतरात्मा का नाद था।”
उस समय उनकी आँखें डबडबा गई थीं। गला रुंध गया था। एक विश्वविजेता नेता, जिसके सामने
दुनिया के बड़े-बड़े दिग्गज झुकते हैं, वह रामलला की बाल सुलभ मूर्ति के सामने एक बालक की
भांति भाव-विभोर हो गया था। उनके कांपते हाथ इस बात का प्रमाण थे कि सत्ता कितनी
भी बड़ी क्यों न हो, वह ‘धर्म’ और ‘ईश्वर’ के सामने सदैव नतमस्तक रहती है।
तपस्या की पराकाष्ठा: 11 दिनों का कठोर व्रत
पीएम मोदी की इस भावुकता के पीछे केवल क्षणिक आवेग नहीं था, बल्कि 11 दिनों की कठिन
तपस्या थी। प्राण प्रतिष्ठा से पहले उन्होंने यम-नियमों का पालन किया था:
- भूमि शयन: कड़कड़ाती ठंड में भी प्रधानमंत्री ने बिस्तर त्याग दिया था और फर्श पर कंबल बिछाकर सोए। Kyo bhavuk huye PM
- सिर्फ नारियल पानी: अन्न का त्याग कर उन्होंने 11 दिन केवल नारियल पानी का सेवन किया।
- तीर्थ यात्रा: वे उन सभी स्थानों पर गए (नासिक, लेपाक्षी, त्रिप्रायर) जहाँ-जहाँ वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम के चरण पड़े थे।
जब शरीर तपता है, तो आत्मा निर्मल होती है। यही कारण था कि गर्भगृह में
पहुँचते ही उनकी आत्मा का बांध टूट गया और भाव अश्रु बनकर बह निकले।
अयोध्या राम मंदिर से जुड़ी 7 अद्भुत और बड़ी बातें (Top Facts)
जिस मंदिर में पीएम मोदी भावुक हुए, वह केवल ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग
और वास्तुकला का एक चमत्कार है। यहाँ जानिए इस मंदिर की कुछ ऐसी बातें जो इसे अद्वितीय बनाती हैं: Kyo bhavuk huye PM
- 1. लोहे का रत्ती भर भी उपयोग नहीं: पूरे मंदिर के निर्माण में कहीं भी लोहे (Iron) या स्टील का इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसे पूरी तरह से पत्थरों को ‘इंटरलॉकिंग तकनीक’ से जोड़कर बनाया गया है, ताकि इसमें जंग लगने का खतरा न रहे और इसकी आयु 1000 वर्ष से अधिक हो।
- 2. नागर शैली की वास्तुकला: मंदिर का निर्माण पारंपरिक नागर शैली में किया गया है। इसकी लंबाई (पूर्व से पश्चिम) 380 फीट, चौड़ाई 250 फीट और ऊंचाई 161 फीट है। यह दुनिया के सबसे भव्य हिंदू मंदिरों में से एक है।
- 3. रामलला की मूर्ति और अरुण योगीराज: गर्भगृह में स्थापित रामलला की 51 इंच की श्यामल (काले पत्थर) मूर्ति को कर्नाटक के मशहूर मूर्तिकार अरुण योगीराज ने बनाया है। इसमें भगवान को 5 वर्ष के बालक के रूप में दर्शाया गया है, जिसकी मुस्कान में दिव्यता और आंखों में मासूमियत है।
- 4. सूर्य तिलक का विज्ञान: मंदिर को विज्ञान और आध्यात्म के संगम से बनाया गया है। राम नवमी के दिन, सूर्य की किरणें सीधे गर्भगृह में पहुंचेंगी और दर्पण व लेंस की एक जटिल प्रणाली के माध्यम से ठीक 12 बजे रामलला के मस्तक पर ‘सूर्य तिलक’ करेंगी।
5. ‘टाइम कैप्सूल’ का रहस्य: मंदिर की नींव में लगभग 2000 फीट नीचे एक ‘टाइम कैप्सूल’ रखा गया है। इसमें राम जन्मभूमि के इतिहास, संघर्ष और तथ्यों की जानकारी सुरक्षित है, ताकि भविष्य में कोई भी इस इतिहास को नकार न सके।
- 6. शालिग्राम पत्थर का उपयोग: मंदिर निर्माण में उन पवित्र शालिग्राम पत्थरों का भी उपयोग किया गया है जो नेपाल की गंडकी नदी से लाए गए थे। ये पत्थर स्वयं भगवान विष्णु का रूप माने जाते हैं।
- 7. 2100 किलो का विशाल घंटा: मंदिर परिसर के लिए एक विशेष अष्टधातु का घंटा तैयार किया गया है जिसका वजन 2100 किलोग्राम है। इसकी ध्वनि कई किलोमीटर तक सुनाई देगी और इसकी गूंज ओंकार (ॐ) की ध्वनि उत्पन्न करती है। Kyo bhavuk huye PM

निष्कर्ष: एक नए भारत का उदय
उस दिन जब पीएम मोदी के हाथ कांप रहे थे और आंखों में आंसू थे, तो वह केवल एक व्यक्ति की
भावना नहीं थी। वह 140 करोड़ भारतीयों की सामूहिक चेतना का प्रकटीकरण था। रामलला का
अपने घर लौटना और सनातन के ध्वज का फहराना यह संदेश था कि भारत अब अपनी जड़ों की
ओर लौट रहा है। मंदिर की भव्यता और पीएम की भावुकता ने यह सिद्ध कर दिया कि राम भारत की ‘आस्था’ ही
नहीं, बल्कि भारत की ‘पहचान’ हैं। वह क्षण जब ध्वज ऊपर उठा, भारत का स्वाभिमान भी
उसी ऊँचाई पर पहुँच गया। सदियाँ बीत जाएंगी। लेकिन वह दृश्य—कांपते हाथ, नम आँखें और
गूंजता ‘जय श्री राम’ का उद्घोष—इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा।
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