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करवा चौथ 2025: पूजन विधि, बधाई संदेश, शायरी और महत्व

चाँद की रोशनी, रिश्तों का प्यार, करवा चौथ लाए खुशियाँ अपार।

करवा चौथ 2025: बधाई संदेश, शायरी, पूजन विधि और महत्व | Karwa Chauth 2025

by- team static study ( Ajeet Mishra, Manoj Kumar ,Er. Arpit Tiwari )

करवा चौथ भारत का एक प्रमुख व्रत और पर्व है। यह पर्व विवाहित महिलाओं के लिए अत्यंत महत्व रखता है। इस दिन पत्नी अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती है। करवा चौथ हर साल कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। यह व्रत केवल धार्मिक मान्यता ही नहीं बल्कि पति-पत्नी के बीच गहरे प्रेम, विश्वास और एकजुटता का प्रतीक भी है।

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भारत में करवा चौथ उत्तर भारत के राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और बिहार में विशेष रूप से मनाया जाता है। अब यह पर्व धीरे-धीरे पूरे भारत और विदेशों में बसे भारतीयों के बीच भी लोकप्रिय हो गया है।


करवा चौथ का इतिहास और पौराणिक मान्यता

पति पत्नी के इस पवन पर्व जुड़ी कई कथाएँ और मान्यताएँ हैं।

  1. सावित्री और सत्यवान की कथा
    कहा जाता है कि सावित्री ने अपने पति सत्यवान की मृत्यु को यमराज से छीन लिया था। उसने तपस्या और दृढ़ संकल्प से यमराज को मजबूर किया और अपने पति को पुनर्जीवित कराया।
  2. वीरवती की कथा
    एक बार वीरवती नामक महिला ने करवा चौथ का व्रत रखा। लेकिन उसके भाइयों ने छल से उसे भोजन करवा दिया। इस कारण उसका पति बीमार पड़ गया। जब उसे सच्चाई पता चली तो उसने सच्चे मन से पुनः व्रत किया और पति की आयु लंबी हो गई।
  3. करवा नाम की पत्नी की कथा
    करवा नाम की महिला ने अपने पति की रक्षा के लिए यमराज से प्रार्थना की। उसकी सच्ची भक्ति से प्रभावित होकर यमराज ने उसके पति को मृत्यु से बचाया। तभी से करवा चौथ का महत्व और भी बढ़ गया।

करवा चौथ का महत्व

  • यह व्रत पति-पत्नी के रिश्ते की मजबूती का प्रतीक है।
  • महिलाएँ निर्जल उपवास करके अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं।
  • यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि पारिवारिक एकता का उत्सव भी है।
  • इस दिन चाँद की पूजा विशेष रूप से की जाती है क्योंकि चाँद को आयु और सौंदर्य का प्रतीक माना जाता है।

करवा चौथ की पूजन विधि (Pooja Vidhi)

चौथ का व्रत बहुत ही सटीक विधि से किया जाता है।

सुबह की सरगी

  • सरगी सुबह सूर्योदय से पहले खाई जाती है।
  • इसे सास द्वारा बहू को दिया जाता है जिसमें फल, मिठाई, सूखे मेवे, पराठे और मिठाइयाँ होती हैं।
  • सरगी खाने के बाद महिला दिनभर निर्जला व्रत रखती है।

पूजन विधि

  1. शाम के समय पूजा का स्थान साफ करें।
  2. एक लकड़ी की चौकी पर भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी और करवा (जल से भरा कलश) रखें।
  3. चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर हल्दी, चावल और दीपक रखें।
  4. चंद्रमा निकलने से पहले करवा चौथ की कथा सुनें।
  5. सुहागिन महिलाएँ एक-दूसरे को करवा और मिठाई देकर आशीर्वाद लेती हैं।
  6. रात को चाँद के दर्शन कर अर्घ्य दें।
  7. पति के हाथ से पानी पीकर व्रत खोलें।

 चौथ 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त

  • तिथि: कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, अक्टूबर 2025
  • उदय कालीन चतुर्थी तिथि: सुबह से प्रारंभ
  • चंद्रोदय का समय: लगभग रात 8 बजे (क्षेत्र अनुसार भिन्न)
  • पूजा का शुभ मुहूर्त: संध्या 5:30 बजे से 7:00 बजे तक

(नोट: स्थानीय पंचांग देखकर सही मुहूर्त अवश्य जानें)


Krwa Chauth बधाई संदेश

  • आपको और आपके परिवार को करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपका जीवन खुशियों से भरा रहे।
  • करवा चौथ आपके दांपत्य जीवन में नई ऊर्जा और विश्वास लाए।
  • पति-पत्नी के रिश्ते में सदैव प्रेम और सम्मान बना रहे।
  • यह पावन पर्व आपके रिश्ते को और गहरा करे।

Karwa Chauth शायरी

  1. चाँद की चाँदनी से आती है रोशनी,
    तुम्हारे जीवन में सदा बनी रहे हँसी।
    करवा चौथ की शुभकामनाएँ।
  2. सुहागिनों का है यह पावन त्योहार,
    पति की लंबी उम्र का करती हैं विचार।
    करवा चौथ पर शुभकामनाएँ अपार।
  3. मेरे जीवन की हर खुशी हो तुम,
    मेरी दुआओं की आरज़ू हो तुम।
    करवा चौथ मुबारक मेरी जान।
  4. न कोई रिश्ता इतना खास होता है,
    न कोई प्यार इतना गहरा होता है।
    जैसा करवा चौथ पर पति-पत्नी का नाता होता है।

करवा चौथ व्रत की विशेष परंपराएँ

  • सौंदर्य और श्रृंगार: महिलाएँ इस दिन विशेष श्रृंगार करती हैं। लाल, गुलाबी या पीली साड़ी पहनती हैं और हाथों में मेहंदी लगाती हैं।
  • कथा वाचन: करवा चौथ की कथा सुनना अनिवार्य माना गया है। यह कथा व्रत को पूर्ण करती है।
  • करवा दान: व्रत करने वाली महिलाएँ एक-दूसरे को करवा और मिठाई देती हैं। इसे शुभ माना जाता है।
  • चंद्रमा का पूजन: चाँद को छलनी से देखना और फिर पति का चेहरा देखना परंपरा है।

करवा चौथ और आधुनिकता

आज के समय में करवा चौथ केवल महिलाओं तक सीमित नहीं रहा। अब कई पति भी अपनी पत्नियों के लिए व्रत रखते हैं। यह आपसी प्रेम और समानता का प्रतीक है।

सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर करवा चौथ से जुड़ी तस्वीरें, शुभकामनाएँ और शायरी खूब साझा की जाती हैं। आधुनिक समय में यह पर्व न केवल धार्मिक है बल्कि सांस्कृतिक उत्सव का रूप ले चुका है।


करवा चौथ से जुड़े ज़रूरी सुझाव

  • व्रत के दौरान सुबह सरगी अच्छी तरह से खाएँ। इसमें फल, दूध और मेवे ज़रूर हों।
  • पूरे दिन आराम करें ताकि निर्जला उपवास से शरीर पर असर न पड़े।
  • पूजा के समय पूरी श्रद्धा और शुद्धता रखें।
  • चंद्रमा के दर्शन के बाद ही व्रत तोड़ें।
  • पति-पत्नी दोनों एक-दूसरे को सम्मान और विश्वास दें। यही इस पर्व का असली संदेश है।

निष्कर्ष

करवा चौथ भारतीय संस्कृति और परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह पर्व न केवल पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूत करता है बल्कि परिवार और समाज में आपसी प्रेम और विश्वास को भी बढ़ाता है। इस दिन की पूजा विधि, बधाई संदेश और शायरी आपके व्रत को और खास बनाते हैं।

करवा चौथ का असली महत्व रिश्तों की गहराई और प्रेम की भावना में है। यही कारण है कि यह पर्व सदियों से भारतीय समाज में मनाया जा रहा है और आने वाली पीढ़ियों तक इसकी परंपरा बनी रहेगी।

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