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गाज़ा सिटी पर कब्ज़ा:

गाज़ा सिटी पर कब्ज़ा:

गाज़ा सिटी पर कब्ज़ा: नेतन्याहू का बड़ा दांव और दुनिया की चिंता 

गाज़ा सिटी पर कब्ज़ा:

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इज़राइल–गाज़ा संघर्ष एक बार फिर बेहद संवेदनशील मोड़ पर आ गया है। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ऐलान किया है कि गाज़ा सिटी पर कब्ज़ा करना ही इस युद्ध को खत्म करने का सबसे तेज़ और सही रास्ता है। उनका दावा है कि इससे न सिर्फ़ हमास की ताकत टूटेगी, बल्कि आम लोगों को भी जल्द राहत मिलेगी।

लेकिन सवाल ये है कि क्या ये कदम सच में युद्ध खत्म करेगा या हालात और बिगाड़ देगा? चलिए, इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।


1. नेतन्याहू का ऐलान — “काम पूरा करना ज़रूरी”

प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेतन्याहू ने साफ कहा कि गाज़ा का लगभग 70–75% इलाका अब इज़राइल के नियंत्रण में है।

  • बचे हुए दो मुख्य इलाके हैं: गाज़ा सिटी और “सेंट्रल कैंप्स”।
  • उनका कहना है कि जब तक ये दोनों जगहें इज़राइल के कब्ज़े में नहीं आ जातीं, युद्ध खत्म नहीं होगा।

उन्होंने यह भी कहा—

“हमारा मकसद गाज़ा के लोगों को नुकसान पहुँचाना नहीं है। हम उन्हें सुरक्षित स्थानों पर भेजेंगे, उन्हें खाना और पानी देंगे, लेकिन हमास को खत्म करना हमारी मजबूरी है।”


2. इज़राइल की रणनीति — तेज़ और निर्णायक हमला

नेतन्याहू के मुताबिक़:

  • गाज़ा सिटी पर कब्ज़ा युद्ध खत्म करने का शॉर्टकट है।
  • इस दौरान आम नागरिकों को पहले सुरक्षित इलाकों में ले जाया जाएगा।
  • इज़राइल अब तक गाज़ा में करीब 2 मिलियन टन मदद पहुँचा चुका है।

उनका कहना है कि अगर इज़राइल का इरादा सिर्फ़ तबाही मचाने का होता, तो वो सालों पहले ही ऐसा कर देता।


3. गाज़ा की ज़मीनी हकीकत

गाज़ा इस समय दुनिया के सबसे भीड़-भाड़ और घनी आबादी वाले इलाकों में से एक है।

  • यहां 20 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं।
  • पिछले कई महीनों से यहां लगातार बमबारी, गोलीबारी और ब्लॉकेड की स्थिति बनी हुई है।
  • बिजली, पानी और खाने की भारी कमी है।

स्थानीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़े डरावने हैं:

  • अब तक 61,000 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं।
  • इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे हैं।
  • सैकड़ों बच्चे कुपोषण और भूख से मर चुके हैं।

4. अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया — बढ़ती नाराज़गी

इज़राइल की इस नई योजना पर दुनिया भर से आलोचना हो रही है।

  • संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख ने कहा:

    “गाज़ा पर इस तरह का कब्ज़ा तुरंत रोका जाना चाहिए, वरना यह और मौत और तबाही लाएगा।”

  • यूरोपीय यूनियन ने चेतावनी दी है कि यह कदम अंतर्राष्ट्रीय कानून के खिलाफ हो सकता है।
  • कई अरब देशों ने इसे खुला आक्रमण करार दिया है।

5. इज़राइल के भीतर भी विरोध

ये सिर्फ़ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विवाद नहीं है, बल्कि इज़राइल के अंदर भी इस फैसले पर सवाल उठ रहे हैं।

  • विपक्षी नेता यायर लापिड ने कहा कि यह योजना सैनिकों और बंधकों की जान खतरे में डाल सकती है।
  • तेल अवीव और अन्य शहरों में लोग सड़कों पर उतरकर “युद्ध बंद करो” के नारे लगा रहे हैं।
  • कुछ मंत्री भी मानते हैं कि यह कदम लंबे समय तक चलने वाली जंग में फंसा सकता है।

6. मानवीय संकट की भयावह तस्वीर

गाज़ा में मदद की स्थिति बेहद खराब है:

  • केवल 14% ज़रूरी सामग्री ही पिछले पखवाड़े में पहुंच पाई है।
  • अस्पतालों में दवाइयों और बिजली की भारी कमी है।
  • लोग साफ पानी के लिए घंटों कतार में खड़े रहते हैं।

मानवीय संगठनों का कहना है कि अगर हालात नहीं बदले तो अगले कुछ हफ्तों में मौत का आंकड़ा दोगुना हो सकता है।


7. नेतन्याहू की दलील बनाम आलोचकों के सवाल

नेतन्याहू का तर्क:

  • कब्ज़ा ज़रूरी है, वरना हमास बार-बार हमला करेगा।
  • आम नागरिकों को नुकसान से बचाने की कोशिश होगी।

आलोचकों के सवाल:

  • क्या कब्ज़ा वास्तव में हमास को खत्म कर देगा?
  • क्या इससे गाज़ा के लोग और ज्यादा नाराज़ नहीं होंगे?
  • क्या यह कदम अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है?

8. ऐतिहासिक संदर्भ — गाज़ा में कब्ज़े की कहानी

गाज़ा का इतिहास भी इस बहस को और पेचीदा बना देता है।

  • 1967 की जंग के बाद इज़राइल ने गाज़ा पर कब्ज़ा किया था।
  • 2005 में इज़राइल वहां से हट गया, लेकिन नाकाबंदी और सीमा नियंत्रण जारी रखा।
  • 2007 से हमास गाज़ा पर शासन कर रहा है।

इस लंबे संघर्ष ने दोनों तरफ गहरे घाव छोड़े हैं।


9. आगे का रास्ता — युद्ध या शांति?

कई विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर नेतन्याहू की योजना लागू हुई, तो:

  • हमास की ताकत कमजोर हो सकती है, लेकिन पूरी तरह खत्म होना मुश्किल है।
  • गाज़ा में बगावत और बढ़ सकती है।
  • अंतर्राष्ट्रीय दबाव इज़राइल पर और बढ़ेगा।

दूसरी ओर, अगर यह कब्ज़ा नहीं हुआ, तो युद्ध और लंबा खिंच सकता है।


10. आम जनता की आवाज़

गाज़ा के एक स्थानीय निवासी ने बीबीसी को बताया:

“हम थक चुके हैं। हमें न हमास चाहिए, न इज़राइल का कब्ज़ा। हमें सिर्फ़ शांति और जीने का मौका चाहिए।”

इज़राइल में भी कई परिवार, जिनके बच्चे सेना में हैं, यही चाहते हैं कि युद्ध जल्दी खत्म हो जाए।


निष्कर्ष

नेतन्याहू का यह कदम एक बड़ा राजनीतिक और सैन्य दांव है।

  • अगर यह सफल रहा, तो इज़राइल इसे अपनी जीत बताएगा।
  • अगर असफल रहा, तो यह गाज़ा और इज़राइल, दोनों के लिए और खतरनाक साबित हो सकता है।

गाज़ा सिटी पर कब्ज़ा सिर्फ़ एक सैन्य ऑपरेशन नहीं, बल्कि मानवीय, राजनीतिक और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा मुद्दा है। आने वाले हफ्तों में दुनिया की नज़र इसी पर टिकी रहेगी।


https://www.bbc.com/hindi/topics/cw2levz5v4jt

https://www.aljazeera.com/tag/gaza/

https://news.un.org/en/tags/gaza-strip

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