डॉ. हरगोविंद भार्गव का बड़ा बयान, शिक्षा, तकनीक और मिशन आधारित राजनीति ही बदल सकती है प्रदेश की दिशा
न्यूज़ विद स्टैटिक स्टडी के विशेष साक्षात्कार में सिधौली से पूर्व विधायक और कृषि अर्थशास्त्री डॉ. हरगोविंद भार्गव ने शिक्षा, तकनीक, जनगणना, जलशक्ति मिशन, कृषि संकट और 2027 की राजनीति पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में आने वाला समय बदलाव का होगा। साथ ही, जनता अब विकल्प तलाश रही है। उल्लेखनीय है कि यह विशेष इंटरव्यू पॉडकास्ट डॉ हरगोविंद भार्गव के साथ प्रस्तुत किया गया है और पॉडकास्ट डॉ हरगोविंद भार्गव को सुनना एक बेहद ज्ञानवर्धक अनुभव है।
शिक्षित नेतृत्व क्यों जरूरी
डॉ. भार्गव कृषि अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रहे हैं और वर्तमान में गुलभास्कर आश्रम पीजी कॉलेज, प्रयागराज में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। उन्होंने कहा कि आज की राजनीति केवल भाषण से नहीं चलती। तकनीकी समझ और नीतिगत दृष्टि जरूरी है।
- एआई और डिजिटल तकनीक नीति निर्माण को प्रभावित कर रही है
- कृषि, उर्वरक और उत्पादन संबंधी फैसलों में वैज्ञानिक सोच चाहिए
- युवा मतदाता पढ़े लिखे नेतृत्व को प्राथमिकता देते हैं
- चीन और जापान तकनीक में भारत से दशकों आगे हैं
उन्होंने कहा कि पढ़ा लिखा व्यक्ति नई सोच के साथ काम करता है और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को बेहतर समझता है। यह विचार पॉडकास्ट डॉ हरगोविंद भार्गव के कार्यक्रम में भी सामने आए।
युवाओं को राजनीति में आने की अपील
डॉ. भार्गव ने कहा कि युवा राजनीति से दूर रहेंगे तो निर्णय वही लोग करेंगे जिनकी सोच पुरानी है। लेकिन उनका मानना है कि मिशन के साथ आने वाले युवा राजनीति की दिशा बदल सकते हैं। पॉडकास्ट डॉ हरगोविंद भार्गव का संदेश युवाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
मिशन बनाम सत्ता की राजनीति
उन्होंने कहा कि वे व्यक्ति या पद से अधिक मिशन को महत्व देते हैं। उनके अनुसार जो दल सामाजिक न्याय और व्यापक भागीदारी की बात करता है, वही उनके लिए प्राथमिक है। इसके अलावा, डॉ हरगोविंद भार्गव की चर्चा पॉडकास्ट के उस भाग में भी हुई। इसमें मिशन आधारित राजनीति पर जोर दिया गया।
सरकार की योजनाओं पर सवाल
जलशक्ति मिशन पर टिप्पणी
- कई गांवों में पानी की टंकियां अब भी चालू नहीं
- हैंडपंप खराब हैं और मरम्मत व्यवस्था कमजोर
- पुराने ढांचे को बंद कर नया सिस्टम पूरी तरह सक्रिय नहीं



उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वैकल्पिक व्यवस्था मजबूत नहीं थी तो पुराने विभाग को क्यों बंद किया गया। पॉडकास्ट डॉ हरगोविंद भार्गव के इसी एपिसोड में जलशक्ति के मुद्दे पर गहरी चर्चा हुई।
कृषि और खाद आपूर्ति
उन्होंने दावा किया कि पहले 50 किलो की खाद की बोरी मिलती थी, अब 40 किलो हो गई है। किसानों को लंबी लाइन में खड़ा होना पड़ता है। आपूर्ति व्यवस्था पर उन्होंने गंभीर सवाल उठाए। इसके अनुसार पॉडकास्ट डॉ हरगोविंद भार्गव में कृषि संकट के बारे में भी विशेष चर्चा की गई।
राफेल सौदे पर दृष्टिकोण
उन्होंने कहा कि राफेल विमान की डील पूर्व सरकार के समय शुरू हुई थी और बाद में उसे पूरा किया गया। उनके अनुसार यह नई पहल नहीं बल्कि अधूरी प्रक्रिया का समापन था। डॉ हरगोविंद भार्गव के पॉडकास्ट में यह राजनीतिक दृष्टिकोण विस्तार से सामने आया।
जनगणना का मुद्दा
डॉ. भार्गव ने कहा कि 2011 के बाद जनगणना नहीं हुई। उनका तर्क है कि बिना अद्यतन आंकड़ों के गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले परिवारों की सही पहचान संभव नहीं। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ प्रभावित होता है। पॉडकास्ट डॉ हरगोविंद भार्गव के अनुसार जनगणना की अनुपस्थिति पर गंभीर प्रश्न हैं।
विपक्ष और सत्ता के रिश्ते
उन्होंने कहा कि हर दल की अपनी नीति होती है। विपक्ष और सत्ता के बीच वैचारिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन जनता के मुद्दे सर्वोपरि होने चाहिए। डॉ हरगोविंद भार्गव के पॉडकास्ट में विपक्ष और सत्ता की बहस काफी विचारपूर्ण रही।
सिधौली में लोकप्रियता का दावा
डॉ. भार्गव ने कहा कि उन्हें लगभग 98 हजार मत मिले थे और वे आज भी जनता के संपर्क में हैं। उनका दावा है कि उनके कार्यालय में आने वाले लोगों की समस्याओं को प्राथमिकता दी जाती है। इस वरिष्ठ कार्यकर्ता की लोकप्रियता पॉडकास्ट डॉ हरगोविंद भार्गव में भी उजागर हुई।
जाति और धर्म की राजनीति पर रुख
उन्होंने कहा कि वे जातिगत और धर्म आधारित राजनीति के पक्ष में नहीं हैं। सभी धर्मों के सम्मान की बात करते हुए उन्होंने सामाजिक समरसता पर जोर दिया। उल्लेखनीय है कि पॉडकास्ट डॉ हरगोविंद भार्गव में भी इस पहलू पर विचार साझा हुए।
2027 को लेकर दावा
साक्षात्कार के अंत में उन्होंने कहा कि जनता सरकार के वादों का मूल्यांकन कर रही है। इसके अलावा, उन्होंने दावा किया कि 2027 में उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि जनता नए विकल्प पर विचार कर रही है। इसके साथ पॉडकास्ट डॉ हरगोविंद भार्गव के मंच पर भविष्य की राजनीति का उल्लेख देखने को मिला।
निष्कर्ष
यह साक्षात्कार उत्तर प्रदेश की राजनीति में चल रहे विमर्श को सामने लाता है। साथ ही, शिक्षा बनाम पारंपरिक नेतृत्व, मिशन आधारित राजनीति, तकनीक आधारित विकास और कृषि संकट जैसे मुद्दे आने वाले चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। पॉडकास्ट डॉ हरगोविंद भार्गव के अनुसार, यह चुनावी विमर्श सामाजिक परिवर्तन हेतु प्रेरित कर सकता है।















