Donald Trump’s big statement क्या अमेरिका दोबारा अफगानिस्तान के बगराम एयरबेस पर कब्जा करेगा?
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ऐसा बयान दिया है जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका को अफगानिस्तान का बगराम एयरबेस वापस लेना चाहिए। यह वही एयरबेस है जो दो दशक तक अमेरिकी सैन्य अभियानों का केंद्र रहा। ट्रंप का दावा है कि यह बेस चीन के परमाणु कार्यक्रम के बेहद करीब है और अमेरिकी सुरक्षा के लिए जरूरी है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!ट्रंप का यह बयान केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है। इसका सीधा असर अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत और चीन की रणनीति पर पड़ सकता है। सवाल यह है कि क्या अमेरिका फिर से अफगानिस्तान लौटेगा और तालिबान से भिड़ेगा?
ट्रंप का बयान और उसके मायने
ब्रिटेन में एक कार्यक्रम के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका को बगराम एयरबेस छोड़ना नहीं चाहिए था। उनके अनुसार, अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी एक बड़ी भूल थी।
- ट्रंप ने कहा कि बगराम एयरबेस चीन की न्यूक्लियर फैसिलिटी के नजदीक है।
- उन्होंने दावा किया कि चीन अपने हथियार उसी इलाके में तैयार करता है।
- उनके मुताबिक, यह बेस अमेरिका की एशिया रणनीति के लिए अनिवार्य है।
ट्रंप के शब्दों ने अमेरिकी मीडिया में बड़ी चर्चा शुरू कर दी। यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि क्या अमेरिका दोबारा अफगानिस्तान जाएगा।
चीन की प्रतिक्रिया
ट्रंप के बयान का असर तुरंत चीन तक पहुंचा। बीजिंग ने कहा कि बगराम एयरबेस का फैसला अफगानिस्तान का अधिकार है।
- चीन का तर्क है कि बाहरी शक्तियों को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
- उसने यह भी कहा कि अमेरिका की ऐसी बातें क्षेत्र में अस्थिरता फैलाती हैं।
- चीन का मकसद साफ है कि अफगानिस्तान की जमीन पर अमेरिका का दोबारा कदम न पड़े।
तालिबान का सख्त रुख
अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने भी प्रतिक्रिया दी।
- तालिबान ने कहा कि यह एयरबेस अमेरिका को कभी नहीं दिया जाएगा।
- उनका बयान था कि अफगानिस्तान की भूमि पर विदेशी कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
- उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका लौटने की कोशिश करता है तो इसका जवाब मिलेगा।
तालिबान की यह स्थिति दर्शाती है कि ट्रंप की सोच आसान नहीं होगी।
बगराम एयरबेस की अहमियत
BAGARAAM एयरबेस अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से लगभग 40 किलोमीटर दूर है।
- यह हिंदू कुश पहाड़ों के करीब स्थित है।
- यहां से सेंट्रल एशिया और चीन तक पहुंच आसान है।
- शिंजियांग प्रांत, जहां चीन की संवेदनशील गतिविधियां होती हैं, बेहद करीब है।
बगराम को नाटो और अमेरिका ने युद्ध के समय विकसित किया।
- इसमें दो रनवे हैं।
- मजबूत एयरक्राफ्ट शेल्टर हैं।
- एडवांस कमांड सेंटर और खुफिया सुविधाएं मौजूद हैं।
- यहां अस्पताल और डिटेंशन फैसिलिटीज भी बनाई गई थीं।
एक समय यहां हजारों सैनिक तैनात रहते थे। यह बेस अफगानिस्तान में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों का नर्व सेंटर था।
क्या अमेरिका दोबारा लौटेगा?
सबसे बड़ा सवाल यही है। क्या अमेरिकी सेना फिर से अफगानिस्तान उतरेगी?
- तालिबान पहले ही मना कर चुका है।
- अगर अमेरिका बेस चाहता है तो सैन्य कार्रवाई करनी होगी।
- ट्रंप की रणनीति पूरे अफगानिस्तान को कब्जाने की नहीं, केवल एयरबेस पर कब्जा करने की हो सकती है।
यह रणनीति कम खर्चीली और ज्यादा प्रभावी मानी जा रही है।
तालिबान बनाम अमेरिका
तालिबान के लिए बगराम पर अमेरिकी वापसी खतरे की घंटी होगी।
- तालिबान शहरों और भीड़ में छिपकर लड़ाई करता है।
- खुले बेस पर अमेरिकी एयरपावर के सामने वह कमजोर पड़ेगा।
- पाकिस्तान से सप्लाई लाइन्स मिलने पर अमेरिका लंबे समय तक बेस संभाल सकता है।
पिछली गलती और नई सोच
2001 से 2021 तक अमेरिका ने अफगानिस्तान में लोकतंत्र स्थापित करने की कोशिश की।
- सरकार और सिस्टम बदलने का प्रयास किया।
- भारी खर्च किया गया।
- लेकिन समाज ने बदलाव स्वीकार नहीं किया।
आखिरकार अमेरिका को पीछे हटना पड़ा।
ट्रंप की सोच अलग है।
- उनका कहना है कि पूरा देश नहीं, केवल बेस चाहिए।
- यह सीमित लक्ष्य अमेरिका को फायदा दिला सकता है।
पाकिस्तान की भूमिका
पाकिस्तान की भूमिका इसमें निर्णायक होगी।
- अमेरिका को सप्लाई लाइन्स पाकिस्तान से ही मिलेंगी।
- बदले में पाकिस्तान को आर्थिक और सैन्य मदद मिल सकती है।
- इससे भारत की सुरक्षा चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
भारत पर असर
भारत हमेशा चाहता है कि अफगानिस्तान स्थिर रहे।
- अगर अमेरिका और तालिबान भिड़ते हैं तो पाकिस्तान को लाभ होगा।
- चीन की भी चिंता बढ़ेगी।
- भारत को अपनी रणनीति पर नए सिरे से सोचना पड़ेगा।
ट्रंप का बगराम एयरबेस से लगाव
ट्रंप कई बार गलत नामों के लिए सुर्खियों में रहे हैं। लेकिन बगराम एयरबेस पर उनकी पकड़ मजबूत है।
- उन्होंने चुनाव अभियानों में बार-बार इसका जिक्र किया।
- उनके मुताबिक अरबों डॉलर खर्च कर बने इस बेस को बर्बाद नहीं होना चाहिए।
- वे इसे एशिया में अमेरिकी पावर प्रोजेक्शन का केंद्र मानते हैं।
भविष्य की दिशा
अब यह देखना होगा कि ट्रंप का यह बयान केवल राजनीति है या असली योजना।
- अगर वे राष्ट्रपति बनते हैं तो बगराम उनका एजेंडा हो सकता है।
- यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मीडिया में लगातार बना रहेगा।
in End
बगराम एयरबेस केवल एक सैन्य ठिकाना नहीं है। यह दक्षिण एशिया, मध्य एशिया और चीन की रणनीति में अहम मोहरा है।
डोनाल्ड ट्रंप का इसे दोबारा पाने का सपना केवल अमेरिका की बात नहीं है, यह पूरे क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।
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