कांग्रेस VS अमित शाह: बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 का विश्लेषण
कांग्रेस VS अमित शाह: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!राज्य में दो बड़े राजनीतिक दल, कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP), अपने गठबंधन के माध्यम से सत्ता की लड़ाई लड़ रहे हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने NDA को 160 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य दिया है।
वहीं कांग्रेस ने इसे चुनावी धांधली और वोट रेवड़ी की राजनीति करार दिया है।
इस लेख में हम बिहार की चुनावी पृष्ठभूमि, पार्टियों की रणनीति, उम्मीदवारों की स्थिति, जातिगत समीकरण और प्रमुख चुनावी मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करेंगे।
1. बिहार का चुनावी परिदृश्य
बिहार की विधानसभा में कुल 243 सीटें हैं। पिछली बार 2020 में NDA ने 125 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की थी,
जबकि महागठबंधन ने 110 सीटें जीती थीं। इस बार चुनाव के लिए भाजपा और
इसके घटक दलों ने मिलकर लगभग 160 सीटों का लक्ष्य रखा है।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इसे चुनौती देने के लिए अपनी रणनीतियाँ तैयार कर रहे हैं।
2. अमित शाह का चुनावी अभियान
अमित शाह ने बिहार में NDA की चुनावी तैयारियों को लेकर कई रैलियाँ और बैठकें की हैं।
उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि वे सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुँचाएं
और अवैध प्रवासियों को राज्य से बाहर करने का संकल्प लें।
उनके बयान का मुख्य उद्देश्य BJP समर्थकों को संगठित करना और मतदाताओं के बीच NDA की पकड़ मजबूत करना है।
3. कांग्रेस की प्रतिक्रिया और रणनीति
कांग्रेस ने अमित शाह के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने इसे ‘वोट चोरी’ की राजनीति कहा और चुनाव आयोग से जांच की मांग की।
कांग्रेस की रणनीति इस बार महागठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की है।
पार्टी ने युवाओं, किसानों और महिलाओं के लिए विशेष योजनाएँ घोषित की हैं।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी चुनावी रैलियों में सक्रिय हैं। #कांग्रेस VS अमित शाह:
4. महागठबंधन और विपक्षी एकता
महागठबंधन (INDIA) में कांग्रेस, RJD, CPI, CPI(M) और अन्य छोटे दल शामिल हैं।
तेजस्वी यादव RJD के प्रमुख उम्मीदवार हैं। विपक्षी एकता का उद्देश्य NDA को हराना और सीटों में संतुलन बनाए रखना है।
इस गठबंधन में सीटों का बंटवारा भी मुख्य मुद्दा रहा है।
कुछ जिलों में उम्मीदवारों को लेकर विवाद हुआ, लेकिन अंततः सभी दलों ने समझौता किया। #amitshah
5. प्रमुख उम्मीदवार और उनकी स्थिति
- तेजस्वी यादव (RJD): विपक्ष के मुख्य चेहरे के रूप में युवा मतदाताओं में लोकप्रिय।
- राहुल गांधी (कांग्रेस): पार्टी की रणनीति में सक्रिय, किसानों और बेरोजगार युवाओं को टारगेट किया।
- अमित शाह (BJP): चुनावी रणनीति और संगठनात्मक कामकाज में मुख्य भूमिका।
- नीतीश कुमार (JD(U)): NDA के घटक दल के रूप में मुख्यमंत्री पद पर उम्मीदवार।
6. जातिगत समीकरण
बिहार के चुनाव में जाति और समुदाय की भूमिका अहम है। यादव, कुर्मी, ब्राह्मण, भूमिहार और मुसलमान मतदाता समूह प्रमुख हैं। BJP और JD(U) का लक्ष्य है कि गैर-यादव और गैर-मुस्लिम वोटों को एकजुट किया जाए। RJD और कांग्रेस यादव और मुसलमान वोटों को आकर्षित करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। जातिगत समीकरण चुनाव के परिणामों को काफी प्रभावित करेंगे। #staticstudy
7. चुनावी मुद्दे
- बेरोजगारी: युवाओं में रोजगार की मांग प्रमुख मुद्दा।
- कृषि और किसान कल्याण: किसानों के लिए योजनाएँ और ऋण राहत योजनाएं चर्चा में।
- शिक्षा और स्वास्थ्य: स्कूल और अस्पतालों की स्थिति मतदाताओं के लिए अहम।
- अवैध प्रवास और सुरक्षा: NDA का मुख्य चुनावी मुद्दा, विपक्ष इसका विरोध करता है।
8. चुनाव आयोग की तैयारी
चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए 470 केंद्रीय पर्यवेक्षक तैनात किए हैं। इनमें 320 IAS अधिकारी, 60 IPS अधिकारी और 90 IRS अधिकारी शामिल हैं। उनका उद्देश्य चुनाव को निष्पक्ष और स्वतंत्र बनाना है। आयोग ने मतदाताओं के लिए जागरूकता अभियान भी शुरू किया है।
9. चुनावी सर्वेक्षण और संभावित परिणाम
हालिया सर्वेक्षणों में NDA और महागठबंधन के बीच कांटे की टक्कर दिखाई दे रही है। कई सर्वेक्षणों के अनुसार NDA को 150-165 सीटों का अनुमान है, जबकि महागठबंधन को 75-90 सीटों की संभावित जीत दिख रही है। हालांकि चुनाव तक स्थिति बदल सकती है, और अंतिम परिणाम मतदाताओं के व्यवहार पर निर्भर करेगा।
निष्कर्ष
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में कांग्रेस और BJP के बीच मुकाबला राजनीतिक दृष्टि से निर्णायक है। चुनावी रणनीति, जातिगत समीकरण, उम्मीदवारों की लोकप्रियता और मुद्दों की महत्ता यह तय करेगी कि राज्य में कौन सत्ता में आएगा। मतदाता जागरूक हैं और उनका निर्णय राज्य और राष्ट्रीय राजनीति दोनों पर असर डालेगा।
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