Static Study

News with Static Study

Advertisement

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की भूमिका

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की भूमिका

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की भूमिका बढ़ाने पर रूस और चीन का समर्थन

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की भूमिका हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र के अवसर पर आयोजित BRICS बैठकमें रूस और चीन ने भारत की सुरक्षा परिषद में अधिक जिम्मेदारी पाने की पहल का समर्थन किया।

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत, ब्राजील और अफ्रीकी देशों को स्थायी सदस्यता देने का प्रस्ताव रखा।

उनका कहना था कि इन देशों की बड़ी आबादी और वैश्विक प्रभाव इसे उचित बनाता है।

चीन ने भी रूस के प्रस्ताव का समर्थन किया और सुरक्षा परिषद में अधिक समावेशिता की आवश्यकता पर जोर दिया।

चीन ने कहा कि इससे वैश्विक शांति और स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।

इस दौरान भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे ने भी भारत और जापान के स्थायी सदस्य बनने का समर्थन किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और चीन का समर्थन भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक जीत है।

दोनों देश पहले से ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं

और उनका समर्थन भारत के विश्व मंच पर प्रभाव बढ़ाने में सहायक हो सकता है।

हालांकि, इस पहल को पूरी तरह से लागू करने के लिए व्यापक वैश्विक समर्थन की आवश्यकता होगी। #संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की भूमिका

सुरक्षा परिषद में सुधार की पृष्ठभूमि

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संरचना 1945 में स्थापित हुई थी और तब से इसमें कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ है।

वर्तमान में परिषद में पांच स्थायी सदस्य हैं: अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस। इन देशों के पास वीटो पावर है,

जिससे किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय को रोकने की शक्ति होती है।

India लगातार परिषद में सुधार की वकालत करता रहा है।

भारत का तर्क है कि दुनिया के बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में उसे स्थायी सदस्यता दी जानी चाहिए।

भारत की जनसंख्या, आर्थिक शक्ति, शांति स्थापना अभियानों में भागीदारी और

वैश्विक राजनीति में बढ़ता प्रभाव इसे यह दर्जा दिलाने के मुख्य कारण हैं।

रूस और चीन का समर्थन

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने BRICS बैठक में कहा कि भारत, ब्राजील और

अफ्रीका के देशों को स्थायी सदस्य बनाने से संयुक्त राष्ट्र अधिक लोकतांत्रिक और प्रभावशाली बनेगा।

उन्होंने जोर देकर कहा कि इन देशों के वैश्विक प्रभाव और जनसंख्या को देखते हुए उन्हें अधिक जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।

चीन ने भी इस पहल का समर्थन किया और कहा कि सुरक्षा परिषद की संरचना में सुधार वैश्विक शांति

और सुरक्षा के लिए जरूरी है। चीन के अनुसार, वर्तमान स्थायी सदस्यता प्रणाली में नए उभरते आर्थिक

और राजनीतिक शक्तियों को शामिल करना जरूरी है।

भूटान और अन्य देशों की प्रतिक्रिया

भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे ने भारत और जापान के स्थायी सदस्य बनने का समर्थन किया।

उन्होंने कहा कि भारत की सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता न केवल एशियाई क्षेत्र के लिए, बल्कि वैश्विक

शांति और सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है।

विशेषज्ञों के अनुसार, रूस और चीन का समर्थन भारत के लिए कूटनीतिक मजबूती का संकेत है।

इससे भारत को वैश्विक मंच पर अपने अधिकारों और दायित्वों को और मजबूती से प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।

संभावित चुनौतियां

हालांकि रूस और चीन का समर्थन महत्वपूर्ण है, फिर भी UNSC में सुधार की राह आसान नहीं है।

कई पश्चिमी देश इस प्रस्ताव के खिलाफ हैं क्योंकि इससे उनकी वीटो शक्ति और प्रभाव कम हो सकता है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का सुधार करने के लिए UN चार्टर में संशोधन आवश्यक है।

यह प्रक्रिया जटिल है और सभी स्थायी सदस्यों के समर्थन की मांग करती है।

इसलिए, भारत को स्थायी सदस्यता दिलाने के लिए लंबी कूटनीतिक प्रक्रिया और व्यापक वैश्विक समर्थन की जरूरत होगी।

भारत के लिए रणनीतिक लाभ

  • वैश्विक सुरक्षा मामलों में अधिक प्रभाव और निर्णय लेने की क्षमता
  • शांति स्थापना अभियानों और अंतरराष्ट्रीय नीतियों में नेतृत्व की भूमिका
  • वैश्विक राजनीतिक मंच पर भारत की प्रतिष्ठा और प्रभाव में वृद्धि
  • क्षेत्रीय और वैश्विक सहयोग को मजबूत करना #संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की भूमिका

भविष्य के परिदृश्य

यदि भारत को स्थायी सदस्यता मिलती है, तो यह न केवल भारत की कूटनीतिक शक्ति बढ़ाएगा

बल्कि सुरक्षा परिषद को और अधिक समावेशी और प्रतिनिधित्वशील बनाएगा।

भारत की बढ़ती भूमिका वैश्विक राजनीति में संतुलन और सहयोग को बढ़ावा दे सकती है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत की स्थायी सदस्यता से एशिया और अफ्रीका के उभरते देशों के हितों की सुरक्षा भी मजबूत होगी।

यह कदम वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में नए दृष्टिकोण और अधिक न्यायसंगत निर्णय लाने में मदद कर सकता है।

निष्कर्ष

रूस और चीन का समर्थन भारत के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की भूमिका बढ़ने से न केवल भारत की वैश्विक पहचान मजबूत होगी,

बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता के प्रयासों में भी मदद मिलेगी। हालांकि,

इसे पूरी तरह से लागू करने के लिए व्यापक वैश्विक समर्थन और कूटनीतिक प्रयास आवश्यक होंगे।

अंततः, यह पहल वैश्विक शक्ति संरचना में बदलाव और नए संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

भारत की सक्रिय भूमिका, क्षेत्रीय और वैश्विक सहयोग को मजबूती प्रदान करेगी और

अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाईयों तक ले जाएगी। #संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की भूमिका

टीम इंडिया ने 5 विकेट से जीता, Static Study टीम की तरफ़ से बधाई

भगत सिंह जयंती 2025: शहीद-ए-आजम को नमन,

Live Cricket Score

एशिया कप 2025 फाइनल: भारत-पाकिस्तान की जंग तय

ट्रेन से मिसाइल लॉन्च

ट्रेन से मिसाइल लॉन्च

अमेरिका का नया H-1B वीज़ा शुल्क

Donald Trump’s big statement

उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो 2025

भारत और अमेरिका के बीच कॉर्न विवाद  

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की भूमिका
भारत और संयुक्त राष्ट्र में भूमिका