Static Study

News with Static Study

Advertisement

भारत का कृषि क्षेत्र

भारत का कृषि क्षेत्र

भारत का कृषि क्षेत्र: दुनिया का सबसे तेज़ी से बढ़ता सेक्टर

भारत का कृषि क्षेत्र

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

भारत का कृषि क्षेत्र हमेशा से देश की अर्थव्यवस्था और समाज की रीढ़ माना गया है। खेती न केवल करोड़ों लोगों की आजीविका का साधन है, बल्कि खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण विकास का सबसे बड़ा आधार भी है। हाल के वर्षों में भारत का कृषि क्षेत्र दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ते हुए सेक्टर के रूप में सामने आया है।

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में कृषि क्षेत्र ने 3.7% की मजबूत वृद्धि दर्ज की है। यह वृद्धि वैश्विक स्तर पर भी उल्लेखनीय है, क्योंकि कई देशों में कृषि उत्पादन जलवायु संकट और आर्थिक अस्थिरता की वजह से घट रहा है।


कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का बयान

नई दिल्ली स्थित पूसा संस्थान में आयोजित रबी अभियान कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत का कृषि क्षेत्र दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ रहा है।

इस कॉन्फ्रेंस की थीम थी “वन नेशन, वन एग्रीकल्चर, वन टीम”। इस थीम का संदेश साफ है कि किसान, वैज्ञानिक, नीति निर्माता और सरकार सभी मिलकर एक ही टीम की तरह काम कर रहे हैं।

मंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र की यह उपलब्धि सिर्फ एक सरकारी प्रयास का परिणाम नहीं है, बल्कि किसानों की मेहनत, वैज्ञानिकों के शोध और सरकार की योजनाओं का संयुक्त असर है।


भारत के कृषि क्षेत्र की वर्तमान स्थिति

  • भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है।
  • चावल, गेहूं, दाल और सब्जियों के उत्पादन में भारत शीर्ष देशों में शामिल है।
  • बागवानी क्षेत्र में भारत फलों और सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।
  • मछली पालन और पोल्ट्री जैसे सहयोगी क्षेत्रों में भी भारत की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है।

कृषि क्षेत्र का योगदान देश के GDP में लगभग 18% है और इसमें 40% से अधिक लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं।


कृषि क्षेत्र की वृद्धि के प्रमुख कारण

1. अनुकूल मानसून और मौसम

2024 के खरीफ सीजन में औसत से अधिक बारिश हुई। इसका फायदा रबी फसलों को मिला।

  • मिट्टी में नमी पर्याप्त रही।
  • सिंचाई की जरूरत कम हुई।
  • किसानों को फसल लागत घटाने में मदद मिली।

2. सिंचाई सुविधाओं का विस्तार

पहले जहां खेती का बड़ा हिस्सा वर्षा पर निर्भर था, वहीं अब 55% से अधिक कृषि भूमि सिंचित हो चुकी है।

  • प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत नहरों और ट्यूबवेल्स का विस्तार हुआ।
  • ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम को बढ़ावा मिला।

3. उच्च गुणवत्ता वाले कृषि इनपुट

  • बीजों में नई हाइब्रिड किस्में लाई गईं।
  • उर्वरकों की आपूर्ति को डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम से मजबूत किया गया।
  • जैविक खेती और प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा मिला।

4. सरकारी योजनाएं और निवेश

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ने किसानों को जोखिम से बचाया।
  • PM-KUSUM योजना के तहत सौर पंप लगाए गए।
  • एग्री इंफ्रा फंड ने किसानों को गोदाम और कोल्ड स्टोरेज बनाने में मदद दी।
  • MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर खरीद की गारंटी ने किसानों की आय सुरक्षित की।

5. फसल विविधीकरण

किसान अब केवल गेहूं और चावल जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर नहीं हैं।

  • बागवानी, मसाले, औषधीय पौधे, डेयरी और मत्स्य पालन जैसे विकल्प अपनाए जा रहे हैं।
  • इससे किसानों की आय बढ़ी है और जोखिम कम हुआ है।

6. डिजिटल तकनीक का उपयोग

  • ड्रोन से फसल सर्वे और स्प्रे का काम हो रहा है।
  • किसान ऐप और ई-नाम प्लेटफॉर्म से फसल की सही कीमत मिल रही है।
  • कृषि डेटा और मौसम पूर्वानुमान से किसानों की योजना बेहतर हो रही है।

भारत के कृषि क्षेत्र की चुनौतियां

कृषि क्षेत्र की तेज़ वृद्धि के बावजूद कुछ चुनौतियां सामने हैं।

1. क्षेत्रीय असमानता

  • पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में सिंचाई और मंडी सुविधाएं बेहतर हैं।
  • लेकिन झारखंड, छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर राज्यों में किसान अब भी पीछे हैं।

2. मौसम पर निर्भरता

  • अधिक बारिश से जहां उत्पादन बढ़ता है, वहीं बाढ़ प्रभावित राज्यों में फसलें नष्ट हो जाती हैं।
  • जलवायु परिवर्तन से अनिश्चितता बढ़ रही है।

3. पोस्ट हार्वेस्ट लॉस

  • भंडारण और कोल्ड स्टोरेज की कमी से 30-40% फसल बर्बाद हो जाती है।
  • सप्लाई चेन मजबूत न होने से किसानों को नुकसान झेलना पड़ता है।

4. मूल्य अस्थिरता

  • टमाटर और प्याज जैसी फसलों की कीमतें अचानक बहुत बढ़ जाती हैं और फिर गिर जाती हैं।
  • इसका असर किसानों और उपभोक्ताओं दोनों पर पड़ता है।

5. छोटे किसानों की स्थिति

  • 86% किसान छोटे और सीमांत हैं।
  • भूमि का औसत आकार घटकर केवल 1.1 हेक्टेयर रह गया है।
  • आधुनिक तकनीक और योजनाओं का लाभ इन तक सीमित मात्रा में पहुंच रहा है।

आगे का रास्ता

भारत के कृषि क्षेत्र को और मजबूत करने के लिए कुछ कदम जरूरी हैं।

  1. सिंचाई और जल प्रबंधन को और विस्तार देना।
  2. कोल्ड स्टोरेज और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को ग्रामीण स्तर तक पहुंचाना।
  3. छोटे किसानों के लिए विशेष योजनाएं बनाना।
  4. कृषि निर्यात को बढ़ावा देना ताकि किसानों को वैश्विक बाजार मिले।
  5. जैविक और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना ताकि मिट्टी और पर्यावरण सुरक्षित रहे।

At last something

भारत का कृषि क्षेत्र आज दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता हुआ क्षेत्र है। यह किसानों की मेहनत, वैज्ञानिकों की खोज और सरकार की नीतियों का संयुक्त परिणाम है। चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन सही दिशा में प्रयास जारी रहे तो भारत न केवल खाद्य सुरक्षा में आत्मनिर्भर होगा बल्कि वैश्विक कृषि शक्ति भी बनेगा।

Left handed people ;

भारत और अमेरिका के बीच कॉर्न विवाद

भारत और अमेरिका के बीच कॉर्न विवाद

GST 2.0 के बदलाव और असर

NATO का Article 4 हुआ लागू

NATO का Article 4 हुआ लागू


static study