
Bangladesh Violence December 2025: A Political Analysis
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बांग्लादेश में अशांति जारी: शरीफ उस्मान हादी की हत्या और हिंसा का नया दौर
जुलाई 2024 की ऐतिहासिक छात्र क्रांति के लगभग डेढ़ साल बाद, बांग्लादेश एक बार फिर गंभीर राजनीतिक अशांति और हिंसा की चपेट में है। दिसंबर 2025 में एक प्रमुख युवा नेता की हत्या ने देश को फिर से अराजकता की ओर धकेल दिया है। अंतरिम सरकार, जिसका नेतृत्व नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस कर रहे हैं, कानून-व्यवस्था को बनाए रखने और कट्टरपंथी तत्वों को नियंत्रित करने में संघर्ष करती हुई दिखाई दे रही है। यह लेख बांग्लादेश की वर्तमान स्थिति, हिंसा के कारणों और इसके दूरगामी परिणामों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
दिसंबर 2025 का संकट: हिंसा की नई लहर
बांग्लादेश में वर्तमान तनाव का मुख्य कारण ‘जुलाई 2024 विद्रोह’ के प्रमुख नेताओं में से एक, शरीफ उस्मान हादी की हत्या है। हादी, जो ‘इंकलाब मंच’ के प्रवक्ता थे, को 12 दिसंबर 2025 को अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मार दी थी। गंभीर हालत में उन्हें सिंगापुर के एक अस्पताल में ले जाया गया, जहां 18 दिसंबर को उनकी मृत्यु हो गई।
हादी की मौत की खबर फैलते ही पूरे बांग्लादेश में हिंसक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। उनके समर्थकों ने आरोप लगाया कि इस हत्या के पीछे अपदस्थ अवामी लीग के अवशेषों या बाहरी ताकतों का हाथ है। इसके प्रतिशोध में देश भर में आगजनी, तोड़फोड़ और मोब लिंचिंग (भीड़ द्वारा हत्या) की घटनाएं सामने आईं।
महत्वपूर्ण घटनाक्रम: हादी की मौत के बाद, प्रदर्शनकारियों की उग्र भीड़ ने ढाका में दो प्रमुख समाचार पत्रों – ‘प्रोथोम आलो’ और ‘द डेली स्टार’ के कार्यालयों पर हमला किया। भीड़ ने कार्यालयों में आग लगा दी, जिससे कई पत्रकार और कर्मचारी इमारत के अंदर फंस गए। यह हमला बांग्लादेश में प्रेस की स्वतंत्रता पर एक गंभीर प्रहार माना जा रहा है।
अल्पसंख्यकों पर हमले और मानवाधिकार की स्थिति
बांग्लादेश में जब भी राजनीतिक अस्थिरता आती है, उसका सबसे भयानक खामियाजा वहां के धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदू समुदाय को भुगतना पड़ता है। दिसंबर 2025 की हिंसा भी इससे अछूती नहीं रही। मैमनसिंह (Mymensingh) जिले में ईशनिंदा के आरोपों के बाद भीड़ ने दीपू चंद्र दास नामक एक हिंदू युवक की पीट-पीट कर हत्या (लिंचिंग) कर दी।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि “बहुसंख्यक वर्ग से बाहर के लोगों को सुरक्षित महसूस करने का अधिकार है।” यह घटना दर्शाती है कि अंतरिम सरकार के 15 महीने के कार्यकाल के बाद भी कट्टरपंथी भीड़ को नियंत्रित करने में प्रशासन विफल रहा है। हिंदू मंदिरों और व्यवसायों को निशाना बनाए जाने की खबरें लगातार आ रही हैं, जिससे अल्पसंख्यक समुदाय में भय का माहौल है।
भारत-बांग्लादेश संबंधों में खटास
वर्तमान अशांति का सीधा असर भारत और बांग्लादेश के द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ा है। हादी की हत्या के बाद उग्र भीड़ द्वारा भारत विरोधी नारे लगाए गए और अगरतला में बांग्लादेशी मिशन पर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।
- वीजा सेवाओं पर रोक: सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए, भारत ने बांग्लादेश में अपने वीजा आवेदन केंद्र बंद कर दिए हैं। जवाब में, बांग्लादेशी उच्चायोग ने भी नई दिल्ली में वीजा जारी करना बंद कर दिया है।
- राजनयिक तनाव: नई दिल्ली में बांग्लादेशी उच्चायोग के बाहर प्रदर्शनों को लेकर दोनों देशों के बीच तीखी बयानबाजी हुई है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी धरती पर विदेशी मिशनों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर भारत ने अपनी कड़ी आपत्ति भी दर्ज कराई है।
- सीमा पर चौकसी: हिंसा और संभावित घुसपैठ को देखते हुए भारत ने अपनी सीमाओं पर चौकसी बढ़ा दी है।
अंतरिम सरकार की विफलताएं और चुनौतियां
अगस्त 2024 में शेख हसीना के देश छोड़कर जाने के बाद, मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बनी अंतरिम सरकार से जनता को बहुत उम्मीदें थीं। उन्हें लोकतंत्र को बहाल करने, अर्थव्यवस्था को सुधारने और एक निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन दिसंबर 2025 तक, सरकार की साख पर कई सवालिया निशान लग चुके हैं।
1. कानून और व्यवस्था का पतन
आलोचकों का कहना है कि यूनुस सरकार ने कट्टरपंथी समूहों को मुख्यधारा में आने की अनुमति दे दी है। प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी पर से प्रतिबंध हटाना और अब ‘इंकलाब मंच’ जैसे समूहों का सड़कों पर उतरना यह दर्शाता है कि सरकार का नियंत्रण कमजोर पड़ चुका है। पुलिस बल का मनोबल गिरा हुआ है और वे भीड़ हिंसा को रोकने में असमर्थ दिख रहे हैं।
2. आर्थिक संकट
राजनीतिक अस्थिरता ने बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है।
विदेशी निवेश घट गया है, और परिधान उद्योग (जो बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है)
लगातार हड़तालों और अशांति के कारण प्रभावित हुआ है। महंगाई आसमान छू रही है,
और सामान्य नागरिकों के लिए जीवन यापन करना कठिन होता जा रहा है।
आईएमएफ (IMF) से मिले बेलआउट पैकेज के बावजूद, आर्थिक सुधार की गति बहुत धीमी है। Bangladesh violence December 2025
3. चुनाव को लेकर अनिश्चितता
अंतरिम सरकार का मुख्य कार्य चुनाव कराना था, लेकिन अभी तक चुनाव की कोई
स्पष्ट तारीख घोषित नहीं की गई है। सरकार का कहना है कि पहले “आवश्यक सुधार”
किए जाएंगे, उसके बाद ही चुनाव होंगे। हालांकि, राजनीतिक दलों और आम जनता का
धैर्य अब जवाब दे रहा है। 2026 की शुरुआत में चुनाव होने की संभावना जताई जा रही थी,
लेकिन मौजूदा हिंसा ने इस पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
अवामी लीग का भविष्य और राजनीतिक शून्य
शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी, जिसने 15 वर्षों तक देश पर शासन किया,
अब पूरी तरह से हाशिए पर है और कई स्तरों पर प्रतिबंधित है।
पार्टी के कई नेता या तो जेल में हैं या भूमिगत हैं। हालांकि,
हादी की हत्या के बाद प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अवामी लीग के वफादार
अभी भी प्रशासन के भीतर सक्रिय हैं और देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं।
दूसरी ओर, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी जैसी पार्टियां
इस राजनीतिक शून्य को भरने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन छात्रों और
युवाओं का एक बड़ा वर्ग, जिसने 2024 की क्रांति का नेतृत्व किया था,
इन पारंपरिक राजनीतिक दलों पर भी भरोसा नहीं करता।
वे एक नई राजनीतिक व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, जिससे देश में सत्ता के कई केंद्र बन गए हैं। Bangladesh violence December 2025
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया
बांग्लादेश की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर है।
- संयुक्त राष्ट्र: मानवाधिकार उच्चायुक्त ने भीड़ द्वारा न्याय करने (Mob Justice) की प्रवृत्ति की निंदा की है और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
- अमेरिका: अमेरिका ने भी स्थिति पर चिंता जताई है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। अमेरिकी निवेश के लिए स्थिरता आवश्यक है, और मौजूदा हालात इसे बाधित कर रहे हैं।
- चीन: चीन ने इसे बांग्लादेश का आंतरिक मामला बताया है, लेकिन वह भी अपने निवेश की सुरक्षा को लेकर चिंतित है। Bangladesh violence December 2025
निष्कर्ष: अनिश्चित भविष्य
दिसंबर 2025 में बांग्लादेश एक चौराहे पर खड़ा है। 2024 की क्रांति ने
तानाशाही से मुक्ति का सपना दिखाया था, लेकिन वर्तमान वास्तविकता
अराजकता और प्रतिशोध की राजनीति में बदल गई है।
शरीफ उस्मान हादी की हत्या ने उस बारूद में चिंगारी का काम किया है जो समाज में पहले से मौजूद था।
डॉ. यूनुस और उनकी अंतरिम सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है:
एक तरफ उन्हें हिंसा पर काबू पाना है और कानून का राज स्थापित करना है,
तो दूसरी तरफ उन्हें जल्द से जल्द एक निष्पक्ष चुनाव का मार्ग प्रशस्त करना है।
यदि स्थिति को जल्दी नियंत्रित नहीं किया गया, तो बांग्लादेश एक लंबे समय
के लिए गृहयुद्ध जैसी स्थिति में फंस सकता है, जो न केवल उसके अपने
नागरिकों के लिए बल्कि पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र की स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा होगा।
शांति और लोकतंत्र की बहाली के लिए यह आवश्यक है कि सभी राजनीतिक दल
और नागरिक समाज हिंसा का त्याग करें और बातचीत के माध्यम से समाधान खोजें।
लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए, यह रास्ता अभी बहुत कठिन और लंबा नजर आता है। Bangladesh violence December 2025
हाल ही में शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद ढाका में स्थिति तनावपूर्ण हो गई है।
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