मोहनलालगंज से समाजवादी पार्टी के सांसद आर के चौधरी ने न्यूज़ विद स्टैटिक स्टडी के विशेष इंटरव्यू में सामाजिक न्याय, संविधान और वर्तमान राजनीति पर खुलकर बात की। इसके अलावा, इस बातचीत में आर के चौधरी पॉडकास्ट के अनुभव, दशकों के राजनीतिक अनुभव, विचारधारा और भविष्य की दिशा साफ दिखाई दी।
राजनीतिक सफर और विचारधारा
आर के चौधरी ने बताया कि उनका राजनीतिक जीवन बहुजन आंदोलन से जुड़ा रहा। वह मान्यवर कांशीराम के समय से सक्रिय रहे। बाद में, समाजवादी पार्टी से जुड़े। उन्होंने कहा कि उनका मूल उद्देश्य व्यक्तिगत सफलता नहीं था। वह एक सफल वकील बन सकते थे। लेकिन सामाजिक बदलाव की सोच ने उन्हें राजनीति में बनाए रखा। इसी तरह, उनके पॉडकास्ट का भी उद्देश्य समाज और बदलाव का संदेश देना है।
उन्होंने साफ कहा कि देश में सामाजिक असमानता आज भी मौजूद है। कोई अगड़ा है, कोई पिछड़ा है। कोई दबा है, कोई आगे बढ़ चुका है। उनके अनुसार संविधान की प्रस्तावना देश को बराबरी की दिशा में ले जाने का संकल्प है। इसके अलावा, उन्होंने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की विचारधारा को देश परिवर्तन की आधारशिला बताया, और हाल में आर के चौधरी पॉडकास्ट के माध्यम से भी अपना दृष्टिकोण साझा किया।
संविधान और लोकतंत्र पर चिंता
सांसद ने कहा कि संविधान की मूल भावना सामाजिक बराबरी है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान समय में संविधान और लोकतंत्र पर दबाव बढ़ रहा है। साथ ही, आरक्षण और कमजोर वर्गों के अधिकारों को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई। आर के चौधरी पॉडकास्ट में भी उन्होंने लोकतंत्र को लेकर कई बार अपनी राय स्पष्ट की है। उनका मानना है कि जब तक दलित, पिछड़े और वंचित समाज को बराबरी का अवसर नहीं मिलेगा, तब तक लोकतंत्र अधूरा रहेगा।
संगोल विवाद पर उनका पक्ष
संसद में संगोल पर दिए गए अपने वक्तव्य को लेकर उन्होंने कहा कि देश बदल रहा है। पहले जिन वर्गों को पढ़ने का अधिकार नहीं था, आज वही लोग शिक्षक, अधिकारी, विधायक और सांसद बन रहे हैं। उनके अनुसार यह बदलाव संविधान की देन है। आर के चौधरी पॉडकास्ट में भी उन्होंने इसी विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए हैं। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि सामाजिक परिवर्तन को पीछे ले जाने वाली किसी भी सोच का विरोध होना चाहिए।
युवाओं के लिए संदेश
राजनीति पर सलाह देते हुए उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे संविधान की मंशा को समझें। उन्होंने कहा कि युवा चाहे किसी भी वर्ग से हों, उन्हें सामाजिक बराबरी के लिए काम करना चाहिए। केवल व्यक्तिगत करियर पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। साथ ही, देश के बदलाव में योगदान देना भी जरूरी है। आर के चौधरी पॉडकास्ट के जरिए भी वह लगातार युवाओं को संबोधित करते हैं।
यूजीसी और आरक्षण का मुद्दा
यूजीसी से जुड़े विवाद पर उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों में भेदभाव की घटनाएं सामने आती रही हैं। उनके अनुसार यदि कोई नीति कमजोर वर्गों को आगे लाने के लिए है तो उसे पूरी मजबूती से लागू किया जाना चाहिए। पॉडकास्ट आर के चौधरी के माध्यम से भी उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का सम्मान करते हुए सामाजिक न्याय के पक्ष में राय रखी।
किसानों की स्थिति पर चिंता
आर के चौधरी ने किसानों की हालत पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि बीज, खाद और अन्य कृषि संसाधन महंगे हो चुके हैं। जबकि फसलों के दाम किसानों को संतोषजनक लाभ नहीं देते। इसके अलावा, उन्होंने जमीन वाले और भूमिहीन दोनों प्रकार के किसानों की समस्या उठाई।
उन्होंने बताया कि शहरों और कस्बों में रोज मजदूरी की तलाश में खड़े रहने वाले लोग आज की आर्थिक सच्चाई हैं। दिन भर इंतजार के बाद भी काम न मिलने की स्थिति सामाजिक असमानता को दिखाती है। उनके अनुसार सरकार को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जिससे ग्रामीण रोजगार और आय दोनों मजबूत हों। विशेष रूप से आर के चौधरी पॉडकास्ट में किसानों की स्थिति के मुद्दे बार-बार उठाए गए हैं।
जमींदारी उन्मूलन और हिस्सेदारी की राजनीति
सांसद ने कहा कि जमींदारी उन्मूलन कानून पूरी तरह लागू होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में हिस्सेदारी आबादी के अनुपात में होनी चाहिए। इसके अलावा, समाजवादी पार्टी की दिशा पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि नेतृत्व सामाजिक न्याय की लाइन पर काम कर रहा है। जैसा कि आर के चौधरी पॉडकास्ट में भी कई बार उल्लेख किया गया है।
अंतिम संदेश
इंटरव्यू के अंत में उन्होंने कार्यकर्ताओं और जनता से संगठित होकर काम करने की अपील की। उनका कहना था कि राजनीतिक बदलाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया से ही संभव है। इसी भावना को वह अपने पॉडकास्ट आर के चौधरी के माध्यम से भी साझा करते रहते हैं। इसके साथ, उन्होंने भरोसा जताया कि सामाजिक बराबरी की दिशा में संघर्ष जारी रहेगा।
यह बातचीत केवल एक राजनीतिक बयान नहीं थी। यह सामाजिक न्याय, संविधान और लोकतंत्र पर एक स्पष्ट दृष्टिकोण भी थी। इसके साथ, मोहनलालगंज के सांसद आर के चौधरी ने अपने अनुभव और विचारों के जरिए यह संदेश दिया कि राजनीति का उद्देश्य सत्ता नहीं, बल्कि समाज में संतुलन और बराबरी स्थापित करना होना चाहिए।





